बिहार में कागजों पर ही हुआ 4.5 लाख टन अनाज का आवंटन ,एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

0
169

बीरेंद्र कुमार झा

जन वितरण दुकानों में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को मुफ्त में मिलने वाले अनाज का बंदरबांट कर दिया गया है।इस गड़बड़ी के आरोप को लेकर फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के महामंत्री गौरव लाभ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में अनाज आवंटन में हुई गड़बड़ी की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की गई है।

एसोसिएशन का आरोप

जन वितरण प्रणाली एसोसिएशन का आरोप है की कोरोना काल के दौरान जन वितरण दुकानों में अनाज का वास्तविक रूप से आवंटन हुआ नहीं हुआ, लेकिन पदाधिकारियों और तकनीकी कर्मियों ने आपसी मिलीभगत से कागजों में ऐसे आवंटन कर दिए। गौरतलब है कि कुछ जगहों पर तो मृत जनवितरण प्रणाली के दुकानदारों को भी अनाज आवंटित कर दिया गया। जब इसे लेकर खुलासा हुआ तो बचने के लिए पदाधिकारियों और तकनीकी कर्मियों ने मृत दुकानदार के परिजन को इससे टैग कर आवंटित अनाज को दिखा दिया। आरोप के अनुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत राज्य भर में लगभग 4:50 लाख टन अनाज की हेराफेरी का अनुमान है। इसका बाजार लगभग 250 करोड़ के आसपास लगाया जा रहा है।

कोरना काल में अनाज आवंटन में हुई गड़बड़ी

फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के महामंत्री ने बताया कि कोरोना काल वर्ष 2020 और 2021 में जन वितरण दुकानों में अनाज आवंटन में भारी गड़बड़ी हुई है। 70 से 80% दुकानों में अनाज आवंटित नहीं हुआ, लेकिन कृत्रिम रूप से विभाग ने अनाज के आवंटन को कागजों पर दिखा दिया।वर्ष 2021 में जनवरी और मार्च का आवंटन वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं किया गया। मामले का खुलासा होने पर वेबसाइट पर डाटा का मैनिपुलेट कर आनन फानन में डाटा तैयार किया गया।इसमें अनाज आवंटन में भारी गड़बड़ी पाई गई।इसके बाद भी अनाज आबंटन में गड़बड़ी का यह खेल जारी रहा।अपलोड अनाज में बैलेंस और वितरण में कोई तालमेल नहीं मिला। दुकानों को अनाज आवंटन के दौरान बीच-बीच में आवंटन शून्य रहा जबकि अगले माह बैलेंस और वितरण अनाज में अंतर दिखा।इस बाबत शिकायत भी दर्ज कराई थी,लेकिन अधिकारियों ने मिलीभगत होने के कारण इसपर कोई कार्रवाई नहीं की।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here