Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विधानसभा के पास टकराव की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से किए गए पथराव में चार पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं समेत कई आंदोलनकारी घायल हुए।
बैरिकेड टूटने के बाद बिगड़ा माहौल
भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों को लेकर आंदोलन के 17वें दिन सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे पुराने विधानसभा भवन के बाहर से छात्रों ने मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। रास्ते में पुलिस ने सुरक्षा के लिए कई बैरिकेड लगाए थे।
जब प्रदर्शनकारियों ने अंतिम अवरोधक को पार करने की कोशिश की तो स्थिति बिगड़ गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज किया। इसके बाद विधानसभा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
सात घंटे तक डटे रहे हजारों छात्र
रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 9 बजे से छात्र विधानसभा मार्च के लिए जुटने लगे थे। शाम चार बजे के बाद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौके पर मौजूद रहे। वाटर कैनन, आंसू गैस और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं होती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
देवेंद्र नाथ महतो भी एंबुलेंस से पहुंचे
आंदोलन के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। वह पिछले नौ दिनों से अनशन पर थे और एंबुलेंस के जरिए मार्च में पहुंचे। उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन का चित्र था।
महतो ने आंदोलन जारी रखने की बात कही और सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उनके मुताबिक, यह सत्याग्रह का 17वां दिन था और वह नौ दिनों से भूख हड़ताल कर रहे थे।
JPSC और JSSC में सुधार की मांग
प्रदर्शनकारी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलन की मुख्य वजह भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को बताया गया है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
1,500 से ज्यादा जवानों की तैनाती
प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए करीब चार किलोमीटर लंबे मार्च मार्ग पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। त्वरित कार्रवाई बल, भारतीय रिजर्व बटालियन, जिला पुलिस और अन्य बलों को मिलाकर 1,500 से ज्यादा जवानों की तैनाती की गई थी। इलाके में निषेधाज्ञा भी लागू की गई थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन के लिए जुटे रहे।
विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित
छात्र आंदोलन के बीच झारखंड विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को विपक्ष की गैरमौजूदगी में चली। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं विधानसभा के बाहर प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार मौजूद रही।
मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर निकाला गया मार्च
यह विधानसभा मार्च मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 51वें जन्मदिन के दिन निकाला गया। प्रदर्शनकारियों के जगन्नाथपुर मंदिर पहुंचने के दौरान पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। स्रोत के अनुसार, आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई थी।
फिलहाल भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव झारखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है।

