झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन की माइनिंग लीज पर सरकार और ईडी से किया जवाब तलब, 1 मई को होगी अगली सुनवाई

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बीरेंद्र कुमार झा

झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खान विभाग के मंत्री रहते हुए रांची स्थित अनगड़ा में खुद के माइनिंग लीज और रिश्तेदारों को अन्य लीज आवंटन करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र और जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ ने प्रार्थी व राज्य सरकार की टीम की दलीलों को सुना। प्रार्थी की दलील पर विचार करने के बाद न्यायालय ने राज्य सरकार , प्रवर्तन निदेशालय (ED) सहित अन्य प्रतिभागियों को जबाव दायर करने का निर्देश दिया।साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 1 मई की तिथि निर्धारित की।

मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह व अधिवक्ता विशाल ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि विभाग के मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अनगड़ा में 88 डिसमिल जमीन पर माइनिंग लीज का आवंटन कराया है। हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और उनकी बहन सरला मुर्मू की कंपनी सोहराय लाइवस्टोक प्राइवेट लिमिटेड के नाम चांहों के बरही औद्योगिक क्षेत्र में 11 एकड़ जमीन आवंटित किया गया। मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू और मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र को भी खनन आवंटित हुआ है।अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पद का दुरुपयोग कर ये सारे काम किए गए हैं।उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया।

जनहित याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर उठा सवाल

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने जनहित याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। समान मामले में शिवशंकर शर्मा की जनहित याचिका पूर्व में सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य के खिलाफ शिवशंकर शर्मा की जनहित याचिका में झारखंड हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। दोबारा उसी बात को उक्त याचिका में उठाया जाना कहीं से भी उचित नहीं है। उन्होंने याचिका को खारिज करने का आग्रह किया।उल्लेखनीय है कि प्रार्थी आरटीआई कार्यकर्ता व हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार महतो ने जनहित याचिका दायर की है।

 

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