मीठा खाने की बात हो, तो ज्यादातर लोग सफेद चीनी की जगह गुड़ को हेल्दी विकल्प मानते हैं।खासकर डायबिटीज के मरीजों के बीच यह धारणा काफी आम है कि चीनी नुकसानदायक है, लेकिन गुड़ खाने से ब्लड शुगर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। यह बात किस हद तक सही है इसके लिए इस दोनों के बीच का अंतर समझना जरूरी है।
दरअसल, चीनी और गुड़ दोनों का सोर्स एक ही है, यानी गन्ना, फर्क सिर्फ इतना है कि चीनी को रिफाइनिंग और क्रिस्टलाइजेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जबकि गुड़ अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड होता है। इसी वजह से गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे कई खनिज तत्व बने रहते हैं, जो सफेद चीनी में लगभग खत्म हो जाते हैं।
ऐसे में लोगों को लगता है कि गुड़ डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित है, लेकिन Metropolisindia के एक्सपर्ट बताते हैं कि न्यूट्रिशन और ब्लड शुगर पर असर दो अलग-अलग बातें हैं।गुड़ में भले ही कुछ अतिरिक्त पोषक तत्व मौजूद हों, लेकिन इसकी शुगर मात्रा चीनी के लगभग बराबर होती है, इसलिए डायबिटीज मरीजों को इसका सेवन भी सावधानी से करना चाहिए।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर माना जाता है कि चीनी ब्लड शुगर को तुरंत बढ़ाती है, जबकि गुड़ सुरक्षित रहता है ।हकीकत यह है कि चीनी शरीर में तेजी से ऑब्जर्व होती है और ब्लड शुगर को जल्दी बढ़ा सकती है।दूसरी तरफ, गुड़ में मौजूद सुक्रोज अपेक्षाकृत मुश्किल संरचना वाला होता है, जिसे टूटने और पचने में थोड़ा अधिक समय लगता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ शुगर स्पाइक नहीं करता, बल्कि इसका असर कुछ देर बाद दिखाई दे सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, गुड़ खाने के बाद ब्लड शुगर तुरंत नहीं बढ़ता है,लेकिन कुछ घंटों के भीतर इसका असर देखा जा सकता है। इसलिए यह मान लेना कि गुड़ डायबिटीज मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, सही नहीं होगा। गुड़ और चीनी दोनों में कैलोरी लगभग समान होती है, लेकिन दोनों की गुणवत्ता में अंतर है। चीनी को अक्सर खाली कैलोरी कहा जाता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व नहीं होते। वहीं गुड़ में मौजूद मोलासेस की वजह से कुछ जरूरी मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल जाते हैं।

