बीरेंद्र कुमार झा
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के इच्छुक लोगों के लिए जम्मू कश्मीर के संविधान द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं पर सवाल उठाया है ।संविधान के अनुच्छेद 370 में किए गए बदलावों को चुनौती देने वाले याचिकाओं को सुनवाई करने वाली पांच जजों की संविधान पीठ में शामिल जस्टिस संजीव खन्ना ने राज्य में स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के लिए एक शर्त के रूप में संपत्ति के मालिक होने का आवश्यकता को अजीब बताया है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह कहना भी बहुत अजीब है कि राज्य का स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के लिए आपके पास राज्य में संपत्ति होनी चाहिए।
जस्टिस खन्ना ने खड़ा किया सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस खन्ना ने राज्य का स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के लिए आपके पास राज्य में संपत्ति होनी चाहिए वाली बात को विचित्र बात तब कहीं जब वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने इस बात पर प्रकाश डालना चाहा की कैसे हजारों हिंदू और सिख परिवार जिन्हें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर से भागना पड़ा था, आज तक अपने पैतृक ग्राम में वापस नहीं लौट पाए हैं और उन्हें तत्कालीन राज्य में समान रूप से विस्थापतों को दिए गए अधिकारों से भी वंचित कर दिया गया है।
अधिवक्ता कृष्णकुमार ने कहा कि यह भेदभाव जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 6 जम्मू कश्मीर पर लागू भारत के संविधान के अनुच्छेद 35 ए के कारण है,जो प्रशासन को ऐसे भारतीय नागरिकों के खिलाफ विशेष रूप से भेदभाव करने का अधिकार देता है। उन्होंने बताया की धारा 6 के अनुसार उनके मुवक्किल जो परिस्थितियों के कारण विस्थापित हुए थे ने स्थायी निवासी होने का अधिकार खो दिया है।
1927 का दस्तावेज
अधिवक्ता कृष्णकुमार ने आगे कहा कि जो लोग प्रावधान के अनुसार स्थायी निवासी की परिभाषा में नहीं आते हैं, उन्हें जम्मू कश्मीर के तत्कालीन शासक द्वारा जारी 1927 के आदेश में स्थायी निवासी की परिभाषा पर वापस आना होगा। इसके बाद जस्टिस खन्ना ने पूछा क्या 1927 का दस्तावेज हासिल करना मुश्किल नहीं होगा?
महेश जेठमलानी ने केंद्र को बताया संप्रभु
अन्य दलीलों में गुज्जर बकरवाल समुदाय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठ मलानी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि भारत और जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों की तुलना स्पष्ट रूप से स्थापित करती है कि ‘ भारत का संघ’ जम्मू कश्मीर के लिए संप्रभु है। उन्होंने कहा कि जहां तक अनुच्छेद 370 का सवाल है, कानूनी संप्रभुता भारत संघ और जम्मू कश्मीर के बीच विभाजित है।अंतिम विधायी संप्रभुता का अधिकार केंद्र के पास है। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज आखिरी दिन है।

