ISRO NVS-03 Launch: स्मार्टफोन से लेकर नेविगेशन तक होगा फायदा! जानिए क्यों खास है ISRO का NVS-03 मिशन

0
6

ISRO NVS-03 Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है। शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अगली पीढ़ी का नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 लॉन्च किया गया। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के बाद रॉकेट ने 2,232 किलोग्राम वजनी सैटेलाइट को निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया।

करीब 50 मीटर ऊंचे और तीन चरणों वाले इस रॉकेट का लॉन्च के समय वजन लगभग 420 टन था। मिशन के तहत सैटेलाइट को ऐसी कक्षा में पहुंचाया गया, जिसकी ऊंचाई पृथ्वी से न्यूनतम 170 किलोमीटर और अधिकतम 37,023 किलोमीटर है।

NVS-02 मिशन की खामी से लिया सबक

NVS-03 की लॉन्चिंग में इसरो ने एक विशेष तकनीकी व्यवस्था अपनाई। इसके तहत सैटेलाइट के पायरो तकनीक से संचालित वाल्व लॉन्च से पहले ही खोल दिए गए। इस बदलाव का उद्देश्य जनवरी 2025 में NVS-02 मिशन के दौरान सामने आई कनेक्टर संबंधी समस्या को दोबारा होने से रोकना है। उस तकनीकी गड़बड़ी के कारण NVS-02 अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच सका था।

बताया गया है कि इस मिशन में विशेषज्ञ समिति की ओर से सुझाए गए सुधारों को भी लागू किया गया है, ताकि लॉन्च के दौरान सैटेलाइट की ईंधन प्रणाली को सुरक्षित रखा जा सके।

क्या है NVS-03 की खासियत?

NVS-03, भारत की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसे देश के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC की सेवाओं को जारी रखने और बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इसमें स्वदेशी रूबिडियम एटॉमिक क्लॉक के साथ अन्य परमाणु घड़ियां भी लगाई गई हैं। सैटेलाइट L1, L5 और S बैंड पर सिग्नल प्रसारित करेगा। L1 बैंड जुड़ने से NavIC आधुनिक स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस में इस्तेमाल होने वाले सिविलियन चिपसेट के लिए भी अधिक उपयोगी बन सकेगा। इसका कवरेज भारत और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक होगा।

आगे क्या होगा?

GTO में पहुंचने के बाद NVS-03 कई चरणों में अपनी कक्षा की ऊंचाई बढ़ाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने पर इसे 32.5 डिग्री पूर्वी देशांतर पर अंतिम जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।

GSLV-F18 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 20वीं उड़ान है। इस मिशन की सफलता से देश के क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here