Inter-Caste Marriage Scheme: जातिगत भेदभाव और सामाजिक दूरी कम करने के उद्देश्य से केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए पात्र दंपतियों को अलग-अलग योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
उपलब्ध योजनाओं में सहायता राशि राज्य और योजना के नियमों के मुताबिक अलग हो सकती है। कई जगहों पर पात्र जोड़ों को ₹50,000 से लेकर ₹5 लाख तक की आर्थिक मदद दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि इस सहायता का लाभ लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
कौन ले सकता है योजना का फायदा?
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजनाओं में आम तौर पर ऐसी शादी को पात्र माना जाता है, जिसमें पति या पत्नी में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) से और दूसरा गैर-SC वर्ग से हो।
इसके अलावा कई योजनाओं में यह भी शर्त होती है कि यह दोनों पक्षों का पहला विवाह होना चाहिए। यानी पति या पत्नी में से किसी की पहले शादी हो चुकी है तो संबंधित योजना के तहत पात्रता प्रभावित हो सकती है। हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित केंद्र या राज्य योजना के मौजूदा नियमों के आधार पर ही तय होगी।
शादी का कानूनी पंजीकरण जरूरी
सिर्फ शादी कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। आर्थिक सहायता का लाभ लेने के लिए विवाह का कानूनी रूप से पंजीकृत होना जरूरी हो सकता है।
आपके दिए गए विवरण के मुताबिक विवाह का पंजीकरण हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 या विशेष विवाह अधिनियम के तहत होना चाहिए। इसलिए योजना के लिए आवेदन करने से पहले विवाह प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार रखना महत्वपूर्ण है।
आवेदन करने में देरी न करें
इस तरह की योजनाओं में आवेदन की समय-सीमा भी महत्वपूर्ण होती है। दिए गए नियमों के अनुसार पात्र दंपति को शादी के एक साल के भीतर आवेदन करना होगा।
समय-सीमा समाप्त होने के बाद आवेदन स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह संबंधित योजना के नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए विवाह के बाद जल्द ही संबंधित विभाग से पात्रता और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी लेना बेहतर है।
केंद्र और राज्यों में अलग-अलग योजनाएं
केंद्र स्तर पर अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. अंबेडकर सामाजिक एकीकरण योजना का उल्लेख किया जाता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भी अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन से जुड़ी योजनाएं संचालित की जाती हैं।
इन योजनाओं में आर्थिक सहायता की रकम, पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए सिर्फ किसी दूसरे राज्य की जानकारी देखकर आवेदन करना उचित नहीं होगा। अपने राज्य के समाज कल्याण विभाग की मौजूदा गाइडलाइन जरूर देखें।
योजना का मकसद क्या है?
इन योजनाओं का मूल उद्देश्य अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करना और समाज में जाति आधारित भेदभाव व सामाजिक दूरी को कम करना है।
सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच आपसी मेलजोल और समानता को बढ़ावा मिले तथा जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक चुनौतियों को कम किया जा सके।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
योजना का लाभ लेने की सोच रहे दंपतियों को आवेदन से पहले कुछ जरूरी बातें जांच लेनी चाहिए:
- पति-पत्नी की जाति से जुड़ी पात्रता योजना के नियमों के अनुरूप हो।
- विवाह का वैध पंजीकरण कराया गया हो।
- पहली शादी से जुड़ी शर्त पूरी होती हो।
- आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए।
- जरूरी प्रमाणपत्र और पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हों।
- सहायता राशि और पात्रता के लिए अपने राज्य की नवीनतम सरकारी गाइडलाइन जरूर जांचें।
अगर आप या आपके परिचित किसी ऐसे विवाह की श्रेणी में आते हैं, तो संबंधित राज्य समाज कल्याण विभाग या केंद्र की आधिकारिक योजना संबंधी जानकारी देखकर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

