मस्जिद को साल में एक बार पूजा से खतरा नहीं तो रोजाना पूजा से खतरा कैसा? ज्ञानवापी केस में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

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बीरेंद्र कुमार झा

ज्ञानवापी केस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गोरी की नियमित पूजा के अधिकार मामले में अपने निर्णय में कहा कि वर्तमान में वहां वर्ष में एक बार पूजा की अनुमति है। जब वर्ष में एक बार पूजा से मस्जिद के चरित्र को कोई खतरा नहीं होता है तो रोजाना या साप्ताहिक पूजा से मस्जिद के चरित्र में बदलाव कैसे हो सकता है?

कानूनी नहीं प्रशासनिक मामला

कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1990 तक रोजाना वहां मां श्रृंगार गौरी, हनुमान और गणेश की पूजा होती थी। बाद में वर्ष में एक बार पूजा की अनुमति दी गई तो सरकार या स्थानीय प्रशासन रेगुलेशन से वहां नियमित पूजा की व्यवस्था कर सकते हैं। इसका कानून से कोई संबंध नहीं है। यह प्रशासन और सरकार के स्तर का मामला है। हाईकोर्ट में श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा के अधिकार मामले में जिला न्यायालय के आदेश को ही बरकरार रखा है।

वक्फ की धारा नहीं होती है लागू

न्यायमूर्ति जे जे मनीष ने कहा कि अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी इसे वक्फ की संपत्ति बता रही है। हिंदू पक्षकार वक्फ संपत्ति को कब्जे में सौंपने या स्वामित्व में लेने की बात अपने दीवानी मुकदमे में नहीं कर रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा के अधिकार से जुड़ा है।इस मामले में वक्फ 1995 की धारा 15 लागू नहीं होती है।

कानूनी कदम नहीं उठाया

कोर्ट ने कहा की 1993 में हिंदू समुदाय द्वारा श्रृंगार गौरी की पूजा रोकने के बाद कई वर्षों तक पूजा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। 2021 में हिंदू पक्षकारों को पूजा करने से रोक दिया गया,लेकिन इससे इनके पूजा के अधिकार की मांग समाप्त नहीं होती है कोर्ट ने कहा कि हिंदू पक्ष श्रृंगार गौरी भगवान गणेश और हनुमान जी की पूजा के अधिकार की मांग कर रहा है।

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