अखिलेश अखिल
ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना हालिया दुर्घटनाओं में सबसे बड़ी है। खासकर पूर्वोत्तर रेल की यह सबसे बड़ी रेल दुर्घटना है। इससे पहले 1981 में इसी जून महीने में बिहार में मानसी -सहरसा रेल खगड़िया के पास पल से नीच गिर गई थी जिसमे करीब हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। आजाद बार्ट की यह सबसे बड़ी रेल दुर्घटना थी। हलाकि इसके बाद देश के भीतर कई दुर्घटनाये हुई है लेकिन बिहार की वह घटना आज भी रोंगटे खड़ा करते हैं। अब बालासोर की यह घटना बेहद दर्दनाक है। इसे ब्लैक फ्राइडे के रूप में भी याद किया जा सकता है। इस दुर्घटना में अब तक 237 लाशें निकली जा चुकी है जबकि सम्भावना जताई जा रही है कि अभी दर्जनों लाशे ट्रैन के भीतर फंसी हुई है। निकलने के प्रयास चल रहे हैं। कारोब 900 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इन घायलों में भी कइयों की हालत बेहद गंभीर है। अस्पतालों में घायलों को रखने में भी दिक्कत आ रही है। अधिकतर घायलों को खून की जरूरत हो रही है।
बालासोर ट्रेन हादसे में जिन लोगों की हालत गंभीर है उसे बचाने के प्रयास चल रहे हैं। इस प्रयास में इंसानियत जाग गए है। सैकड़ों लोग अपना खून देने के लिए कतारों में खड़े हैं और यह सब रात से ही जारी है। इंसानियत का ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया था। देश के स्वस्थ युवा अपना खून देने को बेक़रार दिख रहे हैं। कुछ 2 घंटे से खड़े थे तो कोई 4 घंटे से खड़ा था। ये वे युवा थे, जो मेडिकल कॉलेज में ब्लड डोनेट करने आए थे। हादसे की खबर सुनते और ट्रेन हादसे के वीडियो देखने के बाद इन युवाओं को साफ हो गया था कि यह हादसा बहुत बड़ा है। कई लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं, उन्हें रक्त की जरूरत होगी इसलिए वे दान करने यहां पहुंच गए थे।
ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक कोरोमंडल ट्रेन हादसे ने पूरे देश को हिला दिया है। घटना के बाद लोगों की जान बचाने के लिए लोग रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए। सैकड़ों लोग दुर्घटनास्थल पर पहुंचे तो अस्पताल में भी हुजूम उमड़ पड़ा। जो जिस तरह था ब्लड डोनेट करने के लिए अस्पताल पहुंच गया। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही घंटों में 900 यूनिट ब्लड जमा हो गया। 2000 से ज्यादा लोगों ने ब्लड डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।
घटना की सूचना के बाद रात के बाहर बजे लगभग 2000 युवा ब्लड डोनेशन की लाइन में खड़े थे। ब्लड डोनेशन करनेवालों की भीड़ बढ़ती जा रही थी और ब्लड भी एकत्र होता जा रहा है। कुछ ही घंटों में बालासोर में 500 यूनिट ब्लड जमा हो गया। सुबह तक ब्लड बैंक में 900 यूनिट ब्लड था।
मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे युवा शांति से लाइन में लगे थे। आलम यह था कि जहां तक नजर जा रही थी, युवा लाइन में खड़े नजर आ रहे थे। कोई घायल आता तो युवा लाइन से निकलकर मदद के लिए दौड़ पड़ते और फिर वापस आकर लाइन में लग जाते। कई ने तो ब्लड डोनेशन के लिए सुबह तक लाइन में लगकर अपने नंबर का इंतजार किया।
डॉक्टरों ने बताया कि ब्लड बहुत ज्यादा एकत्र करके नहीं रखा जा सकता है इसलिए 900 यूनिट ब्लड एकत्र होने के बाद डोनेशन रोक दिया गया। उसके बाद युवाओं ने ब्लड डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया। 2000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए। बिना किसी ब्लड डोनेशन कैंप या किसी के बुलावे पर सैकड़ों युवा जमा थे, यह बताता है कि हमारे देश में इंसानियत जिंदा है।
