बीरेंद्र कुमार झा
पाकिस्तान से आई सीमा हैदर इस समय काफी चर्चा में है। यूपी एटीएस ने हाल ही में उससे पूछताछ किया है । उस पर आरोप है कि उसने गैरकानूनी तरीके से भारत में प्रवेश किया है।वह फिलहाल ग्रेटर नोएडा में अपने भारतीय मित्र सचिन मीणा के साथ रह रही है। यह कार्रवाई तब हुई है जब कुछ दिन पहले यूपी एटीएस ने लखनऊ से एक पाकिस्तानी जासूस को गिरफ्तार किया था।सीमा हैदर से पूछताछ में उसने हिंदू धर्म अपनाने का दावा किया था।
ग्रेटर नोएडा के स्थानीय राइटिंग नेताओं ने धमकी देते हुए ऐलान किया है कि अगर पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर को 72 घंटे के भीतर देश से बाहर नहीं निकाला गया तो व्यापक रूप से धरना प्रदर्शन किया जाएगा। एटीएस के अधिकारी से जब मीडिया की तरफ से सवाल किया गया कि सीमा और सचिन को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया जा सकता है या नहीं तो इसपर उन्होंने बताया कि यह सब राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील मामले में पूछताछ के नतीजे पर निर्भर करेगा। स्थानीय पुलिस इस मामले की अलग अलग तरीके से जांच कर रही है ।फिलहाल अभी तक कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है।
अभी तक के पूछताछ के मुताबिक 30 वर्षीया सीमा हैदर अपने चार बच्चों के साथ नेपाल से बस के जरिए भारत आई थी।फिलहाल वह ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में सचिन मीना के पास रह रही है। 4 जुलाई को स्थानीय पुलिस ने सीमा हैदर को गैरकानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, साथ ही सचिन मीना को भी अवैध रूप से और अप्रवासियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद 7 जुलाई को स्थानीय कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी, जिसके बाद से वे रबूपुरा में रह रहे है।
क्या सीमा हैदर को मिल सकती है भारत की नागरिकता
एक तरफ सीमा हैदर को वापस पाकिस्तान भेजने की तैयारी की बात चल रही है वही दूसरी तरफ लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या सीमा हैदर को भारत की नागरिकता मिल सकती है? क्या भारतीय से शादी करने पर उसके पार्टनर को भारत की नागरिकता मिल सकती है? इसे लेकर भारतीय कानून की बात की जाए तो इसमें ऐसा कोई खबर नहीं है जिससे किसी भारतीय पुरुष या महिला के पाकिस्तानी नागरिक से शादी करने पर रोक लगाई जा सके।
भारतीय कानून के मुताबिक किसी व्यक्ति का किसी पाकिस्तानी से शादी करना गैरकानूनी नहीं है ।भारतीय कानून किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के साथी से शादी करने का अधिकार देता है।उनके विवाह में जाति ,धर्म ,क्षेत्र और यहां तक कि देश की सीमाएं भी बाधा नहीं बन सकती हैं।
30 दिन का पब्लिक नोटिस देना है जरूरी
हिंदू मैरिज एक्ट और मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत कोई भी हिंदू या मुस्लिम शादी कर सकता है। कोई भी वालिग व्यक्ति आपसी सहमति से स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत शादी कर सकता है। इसी एक्ट के तहत भारतीय विदेशी के साथ भी शादी कर सकते हैं। हालंकि शादी करने के पहले 30 दिन का पब्लिक नोटिस देना जरूरी होता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि सीमा हैदर और सचिन मीना भी स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत 30 दिन का पब्लिक नोटिस देकर शादी कर सकते हैं।
भारत में शादी करने के हैं कई विकल्प
भारत में पैदा हुए लेकिन दूसरे देश में रह रहे एनआरआई या भारत में जन्मे और विदेश में बसे हुए पीआईओ या एक विदेशी जो किसी दूसरे देश का नागरिक है,उसके पास भारत में शादी करने के कई विकल्प हैं। भारत में अपने धर्म के रीति-रिवाजों के मुताबिक शादी करने के बाद विवाह को अपने धर्म के पर्सनल लॉ के तहत रजिस्टर्ड करना होता है।
एक विदेशी और भारतीया की शादी में विदेशी को भी अपने देश की एंबेसी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लाना होता है।अगर विदेशी तलाकशुदा है तो पिछली शादी के डाइवोर्स की डिक्री भी पेश करना जरूरी है।सीमा हैदर के मामले में भी यही नियम लागू होता है ।
शादी रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेज
अगर कोई व्यक्ति पहले हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों से शादी करता है तो उसे बाद में हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत शादी रजिस्टर करानी होती है। अगर किसी दूसरे धर्म के लोग इस एक्ट के तहत शादी रजिस्टर करना चाहते हैं तो वे धर्म परिवर्तन करके भी इसे करा सकते हैं। इस एक्ट के तहत शादी करने के लिए लड़के की उम्र कम से कम 21 वर्ष और लड़की की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए लड़का और लड़की की तरफ से आवेदन करना होता है। इसमें दोनों का जन्म प्रमाण पत्र, दो पासपोर्ट साइज का फोटो,शादी का निमंत्रण पत्र, तलाकशुदा है तो डाइवोर्स की प्रति, विधवा या विधुर हैं तो पार्टनर का डेथ सर्टिफिकेट लगाना होता है।
भारत में की गई शादी पूरी दुनिया में मान्य
अगर लड़का लड़की कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं तो वे स्पेशल मैरिज एक्ट 1854 के तहत किसी भी नागरिक समारोह में शादी कर सकते हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत वे लोग भी शादी कर सकते हैं, जो अलग-अलग जाति धर्म या देश से हो। यह नियम विदेश में रहने वाले दोनों भारतीय पार्टनर पर भी लागू होता है। भारत में इस तरह की गई शादी शादी सिर्फ भारत में ही नहीं,बल्कि पूरी दुनिया में मान्य होगी। इस कानून के तहत एक भारतीय और एक विदेशी भी भारत में शादी कर सकते हैं।
विदेशी पार्टनर से शादी का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है
स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी का रजिस्ट्रेशन करने के लिए सबसे पहले किसी भी मैरिज रजिस्ट्रार को शादी करने की इच्छा जाहिर करता हुआ एक नोटिस भेजना होता है। नोटिस को30 दिन के लिए मैरिज रजिस्ट्रार के ऑफिस में प्रकाशित किया जाता है।इस दौरान अगर इस नोटिस पर कोई रिश्तेदार आपत्ति नहीं करता है तो 30 दिनों बाद दोनों शादी कर सकते हैं।
शादी पूरी होने के बाद कोर्ट में इसे रजिस्टर कराया जा सकता है। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने वालों को विवाह कराने वाले रजिस्ट्रार और सभी गवाहों के हस्ताक्षर वाला मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के लिए विदेशी पार्टनर का पासपोर्ट ,दोनों का बर्थ सर्टिफिकेट और भारत में 30 दिन से ज्यादा समय से रहने का प्रूफ जमा कराना होता है।
विदेशी पार्टनर को कैसे मिलती है भारतीय नागरिकता
अब सवाल यह उठता है कि क्या विदेशी को एक भारतीय से शादी कर लेने पर अपनेआप भारत की नागरिकता मिल जाती है, या इसके लिए भारत का नागरिकता हासिल करना आसान हो जाता है?कानून के जानकारों का कहना है कि सिर्फ शादी कर लेने से ही किसी को भारत की नागरिकता नहीं मिल जाती है। नियमों के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की शादी भारतीय नागरिकता वाले व्यक्ति से हुई है और वह पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले 7 साल से भारत में रह रहा हैं तो उसे भारत की नागरिकता मिल सकती है।इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि वह भारत में जासुसी या अन्य किसी गैरकानूनी हरकत करने के उद्देश्य से नही आया हो।साथ ही उसके मन में भारत के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना भी होना चाहिए।
पाकिस्तान में विदेशी पति को नागरिकता नहीं मिलती है
पाकिस्तान में भी किसी विदेशी से शादी करने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन विदेशी पार्टनर को पाकिस्तान की नागरिकता मिलने के मामले में एक पेंच है।पाकिस्तान की नागरिकता लेने का प्रावधान नागरिकता अधिनियम 1951 में मौजूद है।अधिनियम की धारा 10 के तहत अगर कोई पाकिस्तानी पुरुष किसी विदेशी महिला से शादी करता है तो वह महिला पाकिस्तानी नागरिकता हासिल करने की हकदार है।वही महिलाओं के किसी विदेशी पुरुष से शादी करने में उस विदेशी पुरुष को यह अधिकार नहीं दिया गया है। साल 2000 में इस कानून में कुछ बदलाव किया गया है।इसके तहत पाकिस्तान की नागरिकता वाले माता-पिता के बच्चों को पाकिस्तानी नागरिकता दी जाएगी।

