मुख्यमंत्री बने रहने के लिए गहलोत ने ठुकराया था कांग्रेस अध्यक्ष का पद,सिर्फ संयोजक बनने के लिए क्या नीतीश कुमार छोड़ेंगे मुख्यमंत्री की कुर्सी

0
133

 

बीरेंद्र कुमार झा
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।सियासी हलकों में इस बात की चर्चा है कि वह जल्दी ही मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने डिप्टी और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को सौंप देंगे।इसके पीछे दलील दी जा रही है कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के मकसद से तैयार विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल एलायंस (INDIA) के तरफ से अगले लोकसभा चुनाव तक संयोजक की कुर्सी दी जा सकती है।

करीब 18 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री की गद्दी पर कायम नीतीश कुमार के लिए किसी भी तरह की भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। और वह अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने की बात हो, तो यह और भी अधिक काल्पनिक लगती है।वह भी ऐसे समय में जब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर पूरी तरह से निश्चिंतता नही है।

गहलोत ने मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए ठुकराए थी कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी

नीतीश कुमार के संभावित कदम के बारे में किसी भी तरह का अनुमान लगाने से पहले हमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस फैसले के बारे में विचार करना चाहिए ,जो उन्होंने कांग्रेस जैसी देश की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले लिया था।इस चुनाव के लिए उन्होंने पूरी तैयारी कर ली थी,लेकिन उससे पहले कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं के द्वारा ‘ एक व्यक्ति एक पद’ की प्रमुखता से वकालत की गई।ऐसे में गहलोत को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती थी। हालांकि उन्होंने ऐसा नहीं किया और खुद को कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से अलग कर लिया था। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री की कुर्सी को सुरक्षित रखा।

पीएम कैंडिडेट से कम पर मानेंगे नीतीश कुमार !

हाल ही में नीतीश कुमार के फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की बात कही गई थी,लेकिन नीतीश कुमार के करीबी मंत्री संजय झा ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इसे नकार दिया ।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह 2025 तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।जदयू नेता के इस बयान से राजद समर्थकों की धड़कमें तेज हो सकती है, जो लगातार कहते हैं कि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाएं और बिहार की यदि तेजस्वी यादव को सौंप दें।

नीतीश कुमार के समर्थक नेता कई मौके पर उन्हें प्रधानमंत्री पद का काबिल दावेदार बता चुके हैं । ईद के मौके पर एक कार्यक्रम के दौरान मंच को लाल किला की थीम पर तैयार किया गया था।इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार खुद पहुंचे थे। हालांकि वह लगातार इस बात से इनकार करते रहे हैं कि उनकी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा हो, लेकिन राजनीति में हमेशा जो कहा जाता है वह होता नहीं है और जो होता है वह कहा नहीं जाता हैं। ऐसे में नीतीश कुमार के अगले कदम पर हर किसी की निगाहें अटकी है। हाल ही में वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे तो कई नेता चौंक गए थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here