जब भी डायबिटीज या ब्लड शुगर की बात होती है, तो लोग सबसे ज्यादा ध्यान चावल, रोटी, ब्रेड और मीठी चीजों पर देते हैं।लेकिन थाली में साथ में रखे अचार, पापड़ और चटनी की तरफ शायद ही किसी का ध्यान जाता है।ये चीजें खाने का स्वाद तो बढ़ा देती हैं, लेकिन क्या इनका असर हमारे ब्लड शुगर पर भी पड़ता है? यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है।इसका जवाब इतना आसान नहीं है कि इन्हें सीधे ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ कह दिया जाए। इनका असर इस बात पर निर्भर करता है कि ये किस चीज से बने हैं, कैसे बनाए गए हैं और कितनी मात्रा में खाए जा रहे हैं।
डाइटिशियन और डायबिटीज एक्सपर्ट कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि अचार, पापड़ और चटनी का ब्लड शुगर पर असर पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा अचार या चटनी है और वह कैसे बनाई गई है।जैसे सरसों के तेल और सिरके में बना नींबू या आम का अचार खाने के बाद ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने में मदद कर सकता है।वहीं दही के साथ बनी धनिया या पुदीने की चटनी में बहुत कम कार्ब्स होते हैं और इसमें फाइबर तथा प्रोटीन भी मिलता है, जो अच्छा माना जाता है।
लेकिन तला हुआ पापड़ या ज्यादा चीनी वाली टमाटर की चटनी इसके उलट काम करती है। ये चीजें शरीर में ज्यादा कार्ब्स और तेल पहुंचाती हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है।एक्सपर्ट का कहना है कि ये चीजें थाली में सिर्फ स्वाद के लिए नहीं होतीं, बल्कि इनका असर सेहत पर भी पड़ता है।अकेले खाने पर इनका असर भले ही कम लगे, लेकिन जब कई चीजें एक साथ खाई जाएं, तो इनका असर बढ़ जाता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, सिरके और फर्मेंटेशन से बनी चीजें खाना पचने की रफ्तार को धीमा कर देती हैं, जिससे शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है।नारियल, तिल या हरी सब्जियों से बनी चटनी भी शरीर में कार्ब्स के अवशोषण को धीमा करती है।सरसों, मेथी और अजवाइन जैसे मसाले भी शरीर में इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं। वहीं दही जैसी चीजें, जिनमें फैट और प्रोटीन होता है, वे भी खाना पचने की रफ्तार धीमी करती हैं।
लेकिन तले हुए पापड़ के साथ ऐसा नहीं होता।तलने की प्रक्रिया में तेल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे उड़द या मूंग से बने पापड़ का असर भी बदल जाता है और यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट यह भी बताती हैं कि बाजार में मिलने वाले पैकेट के अचार और चटनी में अक्सर ज्यादा नमक, प्रिज़र्वेटिव और छिपी हुई चीनी होती है, जो सेहत के लिए अच्छी नहीं मानी जाती. यानी असली फर्क इस बात से पड़ता है कि चीज कैसे बनाई गई है, न कि सिर्फ इस बात से कि वह अचार है, पापड़ है या चटनी.
एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे सही तरीका यह है कि अचार, पापड़ और चटनी को बहुत कम मात्रा में खाया जाए।जहां तक हो सके, ताजी बनी चटनी को चुनें, तले हुए पापड़ की जगह भुना हुआ पापड़ खाएं, और नमक तथा चीनी की मात्रा का हमेशा ध्यान रखें।इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस समझदारी से और सही मात्रा में खाना ही सबसे अच्छा तरीका है।

