हाई कोर्ट जज ने बरी हुए मंत्री की फिर खोली फाइल,आदेश देख सीजेआई भी हुए मुरीद

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बीरेंद्र कुमार झा

तमिलनाडु सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुदि और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के पुराने मामले को दोबारा उठाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के जज की जमकर तारीफ की है। कहा कि शुक्र है कि आपके जैसे जज भी हैं। शीर्ष न्यायालय ने जज की तरफ से दाखिल कारणों को सही माना और मंत्री की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

क्या है ताजा मामला

दरअसल उच्च न्यायालय के जस्टिस एन आनंद वेंकटेश की ओर से एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें मंत्री के पोनमुदिऔर उसकी पत्नी के मामले को ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर करने और बाद में उनके बरी होने के मुद्दे को उठाया गया था। अब मंत्री ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी पेश हुए।

जस्टिस वेंकटेश की तरफ से कारण भी बताए गए कि उन्होंने मंत्री और उसकी पत्नी के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण का मामला क्यों शुरू कराया है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जस्टिस की ओर से बताए गए कारणों को सही माना है। बेंच ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि जज एकदम सही है। यह एक सही आदेश है। भगवान का शुक्र है कि हमारे पास ऐसे जज है।

क्या बोला सुप्रीम कोर्ट

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा की शुक्र है कि हमारे सिस्टम में जस्टिस आनंद वेंकटेश जैसे जज हैं ।देखिए तो चीफ जस्टिस हाई कोर्ट के ने क्या किया ,उन्होंने ट्रायल को एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर किया। मुख्य न्यायाधीश के पास यह ताकत आई कहां से ? और अंत में ट्रायल की वजह से वह बरी हो गए।

सीजेआई के अलावा बेंच में जस्टिस जीपारदी वाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी शामिल रहे।बेंच ने मंत्री की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया

मंत्री के खिलाफ क्या था केस

मंत्री और उनकी पत्नी के खिलाफ यह मामला 1996 और 2001 के बीच का है। उस दौरान पोनमोदी डीएमके सरकार में परिवहन मंत्री थे ।उन पर आए से अधिक संपत्ति के आरोप लगे थे और साल 2002 में डायरेक्टरेट आफ विजिलेंस एंड एंटी करप्शन की तरफ से केस दर्ज किया गया था।इसमें खास बात यह है की शुरुआत में ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट से पोनमुदि को राहत मिल गई थी ।लेकिन साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने डिस्चार्ज ऑर्डर को रद्द कर दिया था। इसके बाद साल 2015 में पोनमुदि और अन्य के खिलाफ फिर आरोप तय किए गए। अब बीते साल जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद मंत्री के खिलाफ जारी ट्रायल को विल्लुपुरम से वेल्लूर लाया गया,जहां 28 जून को मंत्री और पत्नी को बरी कर दिया गया थ।

जस्टिस वेंकटेश के ट्रांसफर पर भी उठाए सवाल ।

जस्टिस वेंकटेश ने 10 अगस्त को ही आदेश जारी की और इस आपराधिक मामले को दोबारा खोला।उनका कहना था कि मामले को ट्रांसफर करना आपराधिक न्याय व्यवस्था में हेर फेर करने की एक कोशिश थी।

गौरतलब है कि जज सुओ मोटो शक्ति का इस्तेमाल कर तमिलनाडु के कई अन्य मंत्रियों के खिलाफ भी ऐसे मामले दुबारा खुलवाएं जहां उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी कर दिया गया था ।उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेलवम सेलवम के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति का मामला दोबारा खोल दिया था।

 

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