Bihar News: बिहार ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक ताकत का लोहा मनवाया है। ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वे में बिहार पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। राज्य में अब तक 6,19,051 पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है, जिससे बिहार राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
हर जिले में सर्वे तेज, ऑनलाइन डेटा अपलोड में भी तेजी
राज्य के सभी जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन पूरा हो चुका है और 35 जिलों से सर्वे का डेटा ऑनलाइन अपलोड भी किया जा चुका है। अब तक 433 सर्वे सत्यापित किए जा चुके हैं, जो इस अभियान की गंभीरता और गति को दर्शाता है।
मुख्य सचिव के सख्त निर्देश—गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सर्वे के दौरान डेटा की शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी काम नहीं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का मिशन है।
अधिकारियों को खुद जाना होगा संग्रहकर्ताओं के पास
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खुद दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संग्रहकर्ताओं से मिलें और उन्हें इस अभियान में सहयोग के लिए सम्मानित करें। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा पाण्डुलिपियां सामने आ सकेंगी।
गलत डेटा से बचने की सख्त हिदायत
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सर्वे के दौरान एक ही स्थान का डेटा बार-बार अपलोड न किया जाए। साथ ही केवल पृष्ठों की संख्या को पाण्डुलिपि मानने जैसी गलतियों से बचने के निर्देश दिए गए। प्रिंटेड किताबें, सिक्के या सामान्य सरकारी दस्तावेजों को पाण्डुलिपि की श्रेणी में शामिल न करने की सख्त हिदायत दी गई है।
अब लक्ष्य—देश में नंबर 1 बनना
सरकार का लक्ष्य है कि बिहार अपनी समृद्ध विरासत को सुरक्षित करते हुए जल्द ही इस सूची में पहला स्थान हासिल करे। इस दिशा में लगातार मॉनिटरिंग, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है।

