सम्राट के शासन में सरकारी और विश्वविद्यालय कर्मियों को वेतन और पेंशन के पड़े लाले

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नीतीश कुमार की जगह पर सम्राट चौधरी के बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर भारतीय जनता पार्टी को भले ही बड़ा लाभ हो गया कि उसका एक और राज्य में खुद की पार्टी का मुख्यमंत्री वाला वाली सरकार बन गई। लेकिन इसके साथ ही बिहार के कई विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों और विश्वविद्यालय में काम करने वाले शिक्षक और शिक्षक कर्मचारियों के साथ -साथ पेंशनभोगियों लिए बड़ा दुर्दिन आ गया। दुर्दिन इसलिए आ गया क्योंकि मैं 4 महीने से वेतन या पेंशन के पैसे नहीं मिल रहे हैं। सरकार से लगातार वाइड की बावजूद इतने दिनों से वेतन या पेंशन नहीं मिलने से अब तो यह हड़ताल पर जाने का मन बनाने लगे हैं। अपने राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और विश्वविद्यालय के सिवा कर्मियों के इस आर्यन को रूप को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार इसके लिए कई तरह के बहाने बनाते हुए अब जल्दी ही इनके लिए पैसे रिलीज करने की बात करने लगी है।
वैसे तो बिहार सरकार का 2026 – 2027 का बजट 347589.76 ,करोड़ का एक सरप्लस बजट है, जिसमें ₹1,143 करोड़ (GSDP का 0.1%) का राजस्व अधिशेष रहने का अनुमान लगाया गया है,जिसका अर्थ है कि सरकार की राजस्व आय उसके सामान्य खर्चों से अधिक होगी।

सम्राट चौधरी इसी पॉजिटिव प्रावधान के आधार पर अपने राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मियों के साथ – साथ पेंशन भोगियों के चार महीने से पैसे नहीं मिलने को लेकर तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कहना है की इन विभागों में और विश्वविद्यालय ने अपने पदों का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट समर्पित नहीं किया है जिस कारण ऐसी स्थिति बनी है। बात एकाद महीने की होती तो मनी भी जा सकती है लेकिन क्या चार-चार महीने तक किन विभागों के कर्मियों के वेतन नहीं मिले हो वही यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट नहीं भेजेंगे। और अगर नहीं भेजेंगे तो फिर ऐसे पदाधिकारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? खैर यह सब बातें तो हो चुकी है और अब जब सम्राट चौधरी ने पैसे रिलीज करने की बात की है तब वेतन और पेंशन की बाट जोह रहे राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के कर्मियों और पेंशन भोगियों के मन में उम्मीद की एक किरण उठी है।

इस दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर विचार करें तो स्थिति निम्नवत नजर आती है:-
विश्वविद्यालय और कॉलेज: राज्य के विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के 50,000 से अधिक शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मार्च से लंबित वेतन और पेंशन के लिए लगभग 998-999 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि: बिहार सरकार ने हाल ही में न्यूनतम मजदूरी में भी संशोधन किया है। अकुशल (Unskilled) श्रमिकों के लिए ₹436 और अति-कुशल के लिए ₹672 प्रतिदिन तक मजदूरी तय की गई है।
नियोजित और संविदा कर्मी: राज्य के 4 लाख से अधिक नियोजित और संविदा कर्मियों के मानदेय की समीक्षा और संशोधन के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, ताकि इनके वेतन को बाज़ार दर और नियमित कर्मचारियों के समकक्ष लाया जा सके।
सातवां और आठवां वेतन आयोग: राज्यकर्मियों के महंगाई भत्ते (DA) में भी लगातार बढ़ोतरी की जा रही है और देश भर में आठवें वेतन आयोग पर चर्चा चल रही है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य के कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

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