PM Surya Ghar Yojana: बिहार में ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने और गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 2.5 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के कार्य का शुभारंभ किया। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 1512 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से इस योजना का शिलान्यास करते हुए कहा कि 20 नवंबर 2026 तक ढाई लाख घरों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे 20 नवंबर 2027 तक राज्य के 25 लाख परिवारों को मुफ्त बिजली योजना का लाभ मिल सके।

अतिरिक्त बिजली बेचकर होगी कमाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के घरों पर लगे सोलर पैनल से 125 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होगा, उस अतिरिक्त बिजली को राज्य सरकार खरीदेगी। इसके बदले उपभोक्ताओं के बैंक खाते में सीधे राशि भेजी जाएगी।

उन्होंने ऊर्जा विभाग को निर्देश दिया कि बिजली खरीद की पूरी प्रक्रिया को ऑटोमेटिक बनाया जाए ताकि उपभोक्ताओं को बिना किसी परेशानी के इसका लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना केवल मुफ्त बिजली देने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का भी माध्यम बनेगी।

1278 करोड़ की ऊर्जा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 1278 करोड़ रुपये की लागत वाली ऊर्जा क्षेत्र की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं से राज्य की बिजली व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

इसके अलावा ऊर्जा लेखांकन स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग परियोजना के तहत फीडर, ट्रांसफार्मर और उपभोक्ता स्तर तक ऊर्जा अकाउंटिंग प्रक्रिया की भी शुरुआत की गई, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।
बिहार सबसे ज्यादा बिजली सब्सिडी देने वाला राज्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश में बिजली उपभोक्ताओं को सबसे अधिक सब्सिडी देने वाला राज्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार हर वर्ष करीब 23 हजार करोड़ रुपये बिजली सब्सिडी पर खर्च कर रही है, जबकि कई बड़े राज्यों में यह राशि काफी कम है।

उन्होंने कहा कि बिहार में घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। यह पहल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
500 मेगावाट से 9000 मेगावाट तक पहुंची बिजली खपत

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 में बिहार में बिजली की खपत केवल 400 से 500 मेगावाट के बीच थी, जो अब बढ़कर 9000 मेगावाट तक पहुंच गई है। यह राज्य के विकास और बिजली क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि बिजली की बेहतर उपलब्धता के कारण बिहार में उद्योग, आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और बढ़ेगी, इसलिए ऊर्जा ढांचे को और मजबूत बनाना जरूरी है।

लाभार्थियों ने जताया आभार
कार्यक्रम के दौरान मुंगेर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और नालंदा के लाभार्थियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री से संवाद किया। लाभार्थियों ने बताया कि सोलर पैनल लगने से उन्हें बिजली बिल से राहत मिलेगी और बची हुई राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा परिवार की जरूरतों पर किया जा सकेगा।

हरित ऊर्जा से मिलेगा पर्यावरण को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। यह योजना बिहार को हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर और ऊर्जा संपन्न राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि आम लोगों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

