Sone Ka Bhav Aaj Ka: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेत, कमजोर मांग और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं में दबाव देखने को मिला। चूंकि शनिवार और रविवार को कमोडिटी बाजार बंद रहते हैं, इसलिए शुक्रवार के बंद भाव ही पूरे वीकेंड के लिए संदर्भ (Reference Rate) माने जाएंगे।
सोने-चांदी पर क्यों बढ़ा दबाव?
हाल के दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, वैश्विक आर्थिक चिंता और निवेशकों की मुनाफावसूली ने बुलियन मार्केट पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके चलते सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे आ गया है। वहीं औद्योगिक मांग में कमी आने से चांदी की कीमतों में भी लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई।
MCX पर सोने का ताजा हाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ ₹1,40,686 प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा। कारोबार के दौरान इसने ₹1,40,733 प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर भी छुआ।
हालांकि दिन बढ़ने के साथ कमजोर मांग और ट्रेडर्स द्वारा मुनाफावसूली के कारण बाजार में दबाव बढ़ गया। इसके बाद सोना करीब ₹413 टूटकर ₹1,39,883 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया।
चांदी की कीमतों में भी लगातार गिरावट
MCX पर 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी भी दबाव में रही। कारोबार की शुरुआत ₹745 की गिरावट के साथ हुई और शुरुआती स्तर ₹2,15,268 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। दिन के कारोबार के दौरान चांदी का भाव करीब ₹2,15,431 प्रति किलोग्राम के आसपास बना रहा।
वीकेंड में यही रहेंगे रेफरेंस रेट
चूंकि शनिवार और रविवार को कमोडिटी बाजार में कारोबार नहीं होता, इसलिए शुक्रवार को बंद हुए भाव ही पूरे वीकेंड के दौरान बाजार के आधिकारिक संदर्भ मूल्य (Benchmark Price) माने जाएंगे।
आगे क्या रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

