बीरेंद्र कुमार झा
संसद में सोमवार को चर्चित ‘ दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ को वोटिंग के बाद मंजूरी दे दी।यह विधेयक दिल्ली में समूह ए के अधिकारियों के स्थानांतरण एवं स्थापना के लिए एक प्राधिकार के गठन के लिहाज से लागू अध्यादेश का स्थान लेगा ।राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 131 और विधेयक के खिलाफ में 102 मत पड़े।लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है।
राज्यसभा में दिल्ली विधेयक पर 7 घंटे चली चर्चा
राज्यसभा में दिल्ली विधेयक पर उच्च सदन में 7 घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। गृह मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इस संबंध में पहले लागू अध्यादेश को स्वीकार करने के कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों के संविधिक संकल्प को नामंजूर कर दिया।इसके साथ विपक्ष द्वारा पेश संशोधनों को भी नामंजूर कर दिया।
अमित शाह ने विधेयक का मकसद दिल्ली के लोगों की हितों की रक्षा करना बताया
चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में अधिकारियों के तबादले एवं तैनाती से जुड़े अध्यादेश के स्थान पर लाए गए विधेयक का मकसद राष्ट्रीय राजधानी के लोगों के हितों की रक्षा करना है,आम आदमी पार्टी की सरकार के हितों को हथियाना नहीं। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य दिल्ली में भ्रष्टाचार विहीन और लोकाभिमुख शासन देना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में जो व्यवस्था थी, उसमें इस विधेयक के माध्यम से किंचित मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है।
कई मामलों में दिल्ली आने राज्यों से अलग: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली कई मायनों में सभी राज्यों से अलग प्रदेश है, क्योंकि यहां संसद, कई संस्थाएं,और सुप्रीम कोर्ट है। वहीं कई राष्ट्राध्यक्ष यहां चर्चा करने आते हैं ,इसलिए इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा के साथ सीमित अधिकार वाला केंद्र शासित प्रदेश है। विधेयक के उद्देश और कारणों में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 239 (क) की उपबांधों के आशय और प्रयोजन को प्रभावी बनाने की दृष्टि से स्थानांतरण, तैनाती , सतर्कता और अन्य मुद्दों से संबंधित विषयों पर उपराज्यपाल को सिफारिश करने के लिए दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली के गृह विभाग के प्रधान सचिव के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री के अध्यक्षता में एक स्थाई प्राधिकरण का गठन करने की बात है।
मोदी जी जनता की बात नहीं सुनना चाहते: केजरीवाल
राज्यसभा में पास हुए दिल्ली सेवा विधेयक पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि मैं सुप्रीम कोर्ट को नहीं मानता। दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को जिताकर साफ कर दिया है कि दिल्ली में दखलअंदाजी मत करना, लेकिन मोदी जी जनता की बात भी नहीं सुनना चाहते हैं।संसद में अमित शाह जी ने कहा कि हमारे पास कानून पारित करने की शक्ति है।आपको लोगों के लिए काम करने की शक्ति दी गई है ,उनके अधिकार छीनने की नहीं ।अरविंद केजरीवाल ने कहा मैं जो भी करता हूं दिल्ली की जनता उसमें मेरा समर्थन करती है और उन्होंने मुझे चुनाव में जीत दिलाकर अपना समर्थन दिखाया है। बीजेपी सिर्फ हमारे अच्छे काम को रोकने की कोशिश कर रही है, विकास कार्य में बाधा डाल रही है।मुझे काम करने से रोकने की कोशिश करने के कारण इस बार जनता उन्हें कोई भी सीट जीतने नहीं देगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई उलझन नहीं हुआ: अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कुछ सदस्यों ने कहा कि इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन करके लाया गया है, लेकिन मैं उन सदस्यों से कहना चाहता हूं कि न्यायालय के फैसले के मनपसंद हिस्से की बजाय पूरा संदर्भ दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में पैरा 86 पैरा 95 और पैरा 164 ऐ में स्पष्ट किया गया है कि अनुच्छेद 239 में संसद को दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के विषय पर कानून बनाने का अधिकार है।
पहले ही प्रयास में विपक्षी एलायंस INDIA फेल
2024 ईस्वी के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को हराने के लिए 26 विपक्षी दलों ने इंडिया नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलाइंस नाम की एक संस्था बनाई है।इस इंडिया एलाइंस के तहत ही 26 विपक्षी दलों ने संसद में एनडीए की तरफ से लाए गए दिल्ली सेवा सेवा बिल को चुनौती देकर अपने ताकत के प्रदर्शन का प्रयास किया, लेकिन नरेंद्र मोदी की अगुआई वाले एनडीए ने इनके इस पहले प्रयास को संसद में फेल करते हुए बहुमत से इस बिल को पास करा लिया।

