फिंगरप्रिंट अथॉन्टिकेशन के दौरान बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है कि उनकी कितनी जानकारी किसी सिस्टम में स्टोर हो रही है। कोई उसे चुरा तो नहीं लेगा? भविष्य में यह चिंता नहीं करनी होगी। रिसर्चर्स की एक टीम ने नई बायोमेट्रिक अथॉन्टिकेशन तकनीक विकसित की है जो अल्ट्रासाउंड की मदद से लोगों की उंगलियों के निशान लेगी लेकिन उनके डेटा को स्टोर किए बिना पहचान पूरी करेगी।
भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक अथॉन्टिकेशन का उपयोग हाेता है।
स्मार्टफोन अनलॉक करने से लेकर, ऑनलाइन पेमेंट और ऑफिस अटेंडेंस के दौरान लोग अपनी उंगली या अंगूठा डिवाइस में लगाते हैं।
इसमें चुनौती यह है कि फिंगरप्रिंट का डेटा लीक हो जाए तो उसे बदला नहीं जा सकता। इसके उलट, पासवर्ड को लोग आसानी से चेंज कर लेते हैं।
टेक एक्सप्लोर की रिपोर्ट के अनुसार, जब भी कोई व्यक्ति फोन या कहीं और अपनी उंगली को फिंगरप्रिंट पर रखता है तो फिंगरप्रिंट सेंसर व्यक्ति की उंगली या अंगूठे का डिजिटल स्ट्रक्चर बनाता है। फिर उसे पहले से स्टोर किए गए फिंगरप्रिंट से मिलाया जाता है। जब दोनों का मैच होता है तो डिवाइस अनलॉक हो जाती है।
मौजूदा फिंगरप्रिंट तकनीक के साथ समस्या यह है कि लोगों को हर बार अपनी उंगली या अंगूठा लगाना पड़ता है। अगर उस समय कोई हैकर, डिवाइस पर अटैक कर दे तो फिंगरप्रिंट चोरी हो सकता है। एक बार चोरी होने पर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट को बदला नहीं जा सकता।
भविष्य में अल्ट्रासाउंड से फिंगरप्रिंट ऑथेन्टिकेशन हो सकता है। रिसर्चर्स ने फिंगरप्रिंट को डिजिटली स्टोर करने और उसे कंपेयर करने का सिस्टम ही हटा दिया है। नई तकनीक में अल्ट्रासाउंड और उंगली के आपस में कनेक्ट होने से व्यक्ति की पहचान हो जाएगी। जैसे ही सही व्यक्ति अपनी उंगली रखेगा, वेव्स यानी तरंगें रजिस्टर्ड एरिया में चली जाएंगी और गलत व्यक्ति के फिंगरप्रिंट रखने पर वेव्स, नॉन रजिस्टर्ड एरिया में चली जाएंगी। इस तकनीक की खास बात है कि उंगली या अंगूठे की कोई डिजिटल इमेज या डेटा नहीं बनेगा और हैकर्स के चुराने के लिए कुछ रहेगा ही नहीं।
रिसर्चर्स ने इस तकनीक को 4 लोगों के फिंगरप्रिंट्स पर 192 बार टेस्ट किया। इसमें सिस्टम ने 97.92% एक्युरेसी हासिल की। तकनीक को जब एक बड़े ग्लोबल फिंगरप्रिंट डेटाबेस पर टेस्ट किया गया तो एक रजिस्टर्ड यूजर के लिए इसकी एक्युरेसी 99.75 फीसदी पर पहुंच गई। इसका मतलब है कि रजिस्टर्ड यूजर हर बार वेरिफाई हो गया।
भविष्य में यह तकनीक हकीकत बनती है तो पूरी तरह से एक नया सिस्टम का करता सकता है और लोगों के फिंगरप्रिंट सेफ रहेंगे, जिन्हें कोई चुरा नहीं पाएगा।

