बदलते मौसम में बच्चों को बुखार आना एक आम बात है, लेकिन कई बार तेज बुखार के साथ बच्चों का ब्लड प्रेशर यानी BP भी गिरने लगता है, जो माता-पिता के लिए चिंता की बात बन जाती है।असल में तेज बुखार आने पर शरीर से पसीने के जरिए काफी पानी निकल जाता है, जिससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाती है। यही डिहाइड्रेशन बच्चों में BP गिरने की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है। इसके अलावा अगर बुखार किसी गंभीर इंफेक्शन की वजह से आया हो, तो भी शरीर में BP कम होने की समस्या देखने को मिल सकती है।ऐसे में कई लोगों को समझ नहीं आता है कि क्या करें।
बच्चों में BP गिरने के कुछ खास लक्षण होते हैं, जिन्हें पहचानना माता-पिता के लिए जरूरी है। अगर बच्चा सुस्त पड़ने लगे, बार-बार नींद में जाने लगे या ठीक से जवाब न दे पाए, तो यह BP गिरने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा बच्चे के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाना, त्वचा का रंग पीला पड़ जाना, सांस तेज या अनियमित होना और चक्कर आने जैसी शिकायत भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।
कुछ मामलों में बच्चे को उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी और बढ़ जाती है और पेशाब भी कम आने लगता है। अगर बच्चा बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस कर रहा हो या रोते-रोते अचानक शांत होकर सुस्त पड़ जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
अगर बुखार के साथ बच्चे का BP गिरने लगे, तो सबसे पहले घबराने की बजाय शांत रहकर सही कदम उठाना जरूरी है। बच्चे को लिटा दें और उसके पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें, इससे दिमाग तक खून का बहाव बेहतर होता है। इसके साथ ही बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर में ORS का घोल, पानी, नारियल पानी या नमक-चीनी का घोल पिलाते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी पूरी हो सके।
बुखार कम करने के लिए बच्चे के माथे और शरीर पर हल्के गुनगुने या सामान्य पानी से भीगा कपड़ा रखें, लेकिन बहुत ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें।बच्चे को तंग कपड़ों से आजादी दें और उसे खुली व हवादार जगह पर रखें। इन सबके साथ ही सबसे जरूरी बात यह है कि अगर बच्चा सुस्त पड़ रहा हो, बेहोशी जैसी हालत में जा रहा हो, हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे हों या सांस तेज हो रही हो, तो देर न करते हुए तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

