रात को समय पर सोना, देर रात तक मोबाइल न चलाना और पूरे आठ घंटे की नींद लेना, इसके बावजूद अगर सुबह उठते ही शरीर टूटा हुआ महसूस हो, आंखों में भारीपन रहे और दिनभर थकान पीछा न छोड़े, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।कई बार शरीर इस तरह किसी गंभीर समस्या का संकेत देता है। चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं।
Hartford HealthCare Medical Group के स्लीप स्पेशलिस्ट Dr. Steven Thau के मुताबिक, सिर्फ नींद के घंटे पूरे होना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि नींद कितनी गहरी और आरामदायक रहे।कई लोग बिस्तर पर तो आठ घंटे बिताते हैं, लेकिन उनका शरीर असली आराम तक पहुंच ही नहीं पाता।
नींद के दौरान शरीर अलग-अलग चरणों से गुजरता है।इनमें हल्की नींद, गहरी नींद और आरईएम स्लीप शामिल होती है।अगर किसी वजह से बार-बार नींद टूटती रहे, तो शरीर गहरी नींद तक नहीं पहुंच पाता. यही कारण है कि सुबह उठने पर थकान बनी रहती है. तनाव, कमरे में शोर, देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत और ज्यादा कैफीन लेने जैसी चीजें गहरी नींद को प्रभावित कर सकती हैं.
इस लगातार बनी रहने वाली थकान के पीछे एक गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जिसे स्लीप एपनिया कहा जाता है।यह ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। डॉ बताते हैं कि कई लोगों को इसका पता तक नहीं चलता, लेकिन दिमाग बार-बार शरीर को सांस लेने के लिए जगाता रहता है। इससे नींद पूरी होने के बावजूद शरीर को आराम नहीं मिल पाता. जोर से खर्राटे आना, नींद में घुटन महसूस होना या दिनभर अत्यधिक सुस्ती रहना इसके संकेत हो सकते हैं।
इसके अलावा, रोज अलग-अलग समय पर सोना और उठना भी शरीर कीसर्कैडियन रिदम को बिगाड़ देता है।यही वजह है कि छुट्टियों में ज्यादा देर तक सोने के बाद भी कई लोग और ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं।
लाइफस्टाइल का भी प्रभाव
खानपान की आदतें भी नींद की क्वालिटी पर असर डालती हैं। देर रात भारी खाना, मसालेदार भोजन या शराब लेने से नींद बार-बार टूट सकती है। वहीं शरीर में पानी की कमी होने पर भी बेचैनी और थकान महसूस होती है। मेंटल तनाव और चिंता भी बड़ी वजह बनते हैं. जब दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, तो शरीर आराम की स्थिति में नहीं पहुंच पाता। ऐसे में ध्यान, गहरी सांस लेने की आदत और सोने से पहले शांत माहौल बनाने से फायदा मिल सकता है।

