बीरेंद्र कुमार झा
लोकसभा चुनाव लोकसभा चुनाव 2024 से पूर्व 2023 के नवंबर महीने में हुए 5 राज्यों मिजोरम,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,राजस्थान और तेलंगाना के विधान सभा चुनाव को लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था।चुनाव से पहले क्या राहुल गांधी,क्या मल्लिकार्जुन खड़गे और क्या कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री सभी के हौसले चरम पर थे।प्रियंका गांधी और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ तक इन विधानसभा चुनावों में हर राज्यों सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की जीत की जीत की ही बात करते। इसके अलावे अगर कोई बात करते तो वह बीजेपी की हार जगह से हार की बात होती। बीआरएस के केसीआर भी तीसरी बार तेलांगना में सरकार बनाने की बात करते।रही बात बीजेपी की तो इसके लिए तो यह इलेक्शन पूरी तरह से इसके साख पर बट्टा लगा देने वाला ही था, लिहाजा इसने भी अपने सारे तिकड़म लगा दिए।खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने आपको इस चुनाव में पूरी तरह से झोंक दिया।सभी राज्यों के चुनावों के चुनावी चेहरे मोदी बने और कमल बना।
7 नवंबर से 30 नवंबर तक हुए मतदान
पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए के लिए 7 नवंबर से 30 नवंबर तक अलग-अलग दिनों में अलग-अलग राज्यों में मतदान हुए। 7 नवंबर को मिजोरम की सभी 40 सीटों के लिए हुए मतदान से यह प्रक्रिया प्रारंभ हुई और 30 नवंबर को तेलंगाना में हुए मतदान के साथ मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। इन पांच राज्यों में से चार राज्यों में सभी सीटों पर एक ही दिन में चुनाव संपन्न कराए गए, जबकि छत्तीसगढ़ इन 5 राज्यों में एकमात्र ऐसा राज्य था, जहां यह चुनाव 7 नवंबर और 17 नवंबर को 2 चरणों में संपन्न कराया गया।
3 दिसंबर को 5 राज्यों में से 4 राज्यों में मतगणना
आज 3 दिसंबर को 3 दिसंबर को 3 दिसंबर को जनता ने विभिन्न नेताओं और राजनीतिक दलों के भाग्य का जो फैसला किया था, मतगणना के साथ ही उसका खुलासा शुरू हो गया। और अब विभिन्न राजनीतिक दालों के दफ्तरों में से कहीं सन्नाटा पसरा है तो कहीं नाच गाने का दौर जारी है मिठाइयां बाती जा रही है।
चुनाव परिणामों में दलगत स्थिति
दोपहर के लगभग 2:00 बजे तक परिदृश्य पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है,हालांकि बातें रुझानों की ही की जाती रही है,क्योंकि अंतिम घोषणा चुनाव आयोग के प्रेस कॉन्फ्रेंस जो अमूमन शाम में होता है उसके द्वारा ही की जाती है, लेकिन अब यह रुझान भी ऐसा है कि इन रुझानों के आधार पर जो राजनीतिक दल जिस राज्य में सत्तासीन होता दिख रहा है, उसे कहीं से भी कोई बड़ा खतरा आने की संभावना लगभग नग्न हो गई है।
राजनीतिक दलों के रूप में बात की जाए तो इस समय भारतीय जनता पार्टी राजस्थान,छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सत्ताशीर्ष तक पहुंचती दिखाई पड़ रही है। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने पिछले चुनाव की तुलना में 52 सीटों का फायदा लेते हुए अपने जीते हुए सीटों की संख्या161 तक पहुंचाकर सत्ता को बरकरार रखने में कामयाब रही है,वहीं इसकी तुलना में कांग्रेस अपने पिछली बार की स्थिति से 48 सीटें खोती हुई 66 सीटों पर सिमट गई है।
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने पिछली बार की तुलना में 41 सीटों पर बढ़त लेते हुए अपने विजयी उम्मीदवारों की संख्या 114 तक पहुंचा लिया है, वहीं इसकी तुलना में कांग्रेस अपनी पिछली स्थिति से 28 सीटों को खोते हुए 71 सीटों पर आकर सिमट गई है।साथ ही इसके हाथ से सत्ता भी छिन गई है।हालांकि कि राजस्थान की परंपरा एक बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस को देखते हुए इसे अचंभा नही कहा जा सकता है,भले ही चुनाव के दौरान कांग्रेस इस बार ऐसे अचंभे की बात कर रही थी जिसमें वह पूरी तरह से असफल रही।
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पिछले चुनाव की स्थिति में सुधार लाते हुए 40 सीटों पर बढ़त बनाते हुए अपने विजयी उम्मीदवारों की संख्या 55 तक पहुंच ली है। वहीं कांग्रेस पिछले चुनाव की तुलना में 36 सीटें खोकर 32 पर सिमट गई है। साथ ही यहां इसके हाथों से सत्ता भी छिन गई है।
कांग्रेस को तेकंगना में खुशी
पांच राज्यों में होने वाले चुनाव में कांग्रेस के लिए एकमात्र खुशी तेलंगाना से आई, जहां कांग्रेस ने अपने पिछली स्थिति में 43 सीटों का इजाफा करते हुए अपने विजयी उम्मीदवारों की संख्या को 62 तक बढ़ा लिया और सत्ताशीर्ष पर पहुंचने में कामयाब रहे, वहीं तेलंगाना की सट्टारूढ़ दल बीआरएस को वहां सत्ताच्युत होना पड़ा। वर्तमान चुनाव में बीआरएस को 46 सीटों का नुकसान हुआ और वह कुल 42 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने भी तेलंगाना में अपने पिछले चुनाव चुनाव की तुलना में शानदार प्रदर्शन किया। यहां इसने 8 सीटों पर बढ़त बनाते हुए अपने विजयी उम्मीदवारों की संख्या 9 तक पहुंचा ली।

