सत्ता लोलुपता के वशीभूत राहुल गांधी ने कांग्रेस को ही फंसा दिया

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सत्ता प्राप्ति का ख्वाब देखते हुए राहुल गांधी ऐसे ऐसे कदम उठा लेते हैं जो अंततः कांग्रेस पार्टी के लिए आत्मघाती हो जाती है। 2024 के आम चुनाव से लेकर 2025 के विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी हिंदू समाज को जाती पाति में बांटने में जुटे रहे और उधर बीजेपी एकजुट हिंदुत्व का नारा देकर बड़े बहुमत से जीतती रही। सत्ता लोलुपता को लेकर विजय थलपति के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी को समर्थन देकर सरकार बनाने में मदद करने वाली ऐसी ही एक चाल राहुल गांधी ने चली है, जिसका विरोध इंडिया अलायंस में कांग्रेस के साथ रहने वाले पार्टियों ने तो किया ही है ,कांग्रेस पार्टी के अंदर से भी इसके विरोध में आवाज उठने लगी है।

तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए थलपति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने की राहुल गांधी की घोषणा होने के साथ तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के एक घरेलू ईकाई ने विरोध करना शुरू कर दिया।तमिलनाडु कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने राहुल गांधी से यह कहकर विरोध जताया कि पुराने गठबंधन को तोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि डीएमके (DMK) के साथ दशकों पुराने गठबंधन को तोड़कर विजय की नई पार्टी TVK के साथ जाना, जिसकी अभी अपनी वैचारिक स्थिति भी स्पष्ट नहीं है, एक आत्मघाती कदम है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं (जैसे मणि शंकर अय्यर का हवाला देते हुए) ने इसे “राजनीतिक अवसरवाद” (Political Opportunism) की संज्ञा दी, न कि वैचारिक गठबंधन। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना था कि विजय की पार्टी के साथ जाने से DMK का विरोध झेलना पड़ेगा, जिससे भविष्य के चुनावों (लोकसभा/स्थानीय निकाय) में नुकसान हो सकता है। कुछ नेताओं का यह भी कहना था कि वर्षों तक DMK के साथ रहने के बाद, ऐन मौके पर उन्हें छोड़कर जाना DMK के साथ विश्वासघात के समान है। हालांकि राहुल गांधी ने थलपति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने को बीजेपी को तमिलनाडु में हर हाल में सत्ता से बाहर रखने को एक राजनीतिक मजबूरी बताते हुए अपने द्वारा उठाए इस कदम को जायज बता दिया और तमिलनाडु में कांग्रेस के समर्थन से थलपति विजय मुख्यमंत्री बनने में सफल हुए।

तमिलनाडु के पड़ोसी राज्य केरलम जहां 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ को बहुमत प्राप्त हुआ है, वहां भी कांग्रेस कमेटी के कुछ नेता राहुल गांधी के इस कदम का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि केरल में कांग्रेस पार्टी वाम दलों के विरोध में चुनाव लड़ती है। राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने के दौरान भी कम्युनिस्ट पार्टी ने वायनाड मैं अपने प्रत्याशी को उतार कर कांग्रेस का विरोध किया था। ऐसे में तमिलनाडु में वाम दलों के साथ ही विजय थलपति की पार्टी टीभीके को समर्थन देने पर केरल में कांग्रेस पार्टी जनता के बीच अपना भरोसा खोी देगी। हालांकि केरल में कांग्रेस पार्टी के नेताओं का यह विरोध जल्दी ही समाप्त हो गया।

इंडिया एलायंस का एक बड़ा घटक दल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी के द्वारा डीएमके का साथ छोड़कर थलपति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने पर बड़ा तंज कसा है। ममता बनर्जी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए अखिलेश यादव ने राहुल गांधी तंज कसते हुए कहा कि हम वह नहीं जो मुश्किल घड़ी में साथ छोड़ दें।

राहुल गांधी के द्वारा थलपति विजय की पार्टी टीवीके को कांग्रेस का समर्थन देने को लेकर डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कई बातें कही। डीएमके ने कांग्रेस के इस कदम को “विश्वासघात” करार देते हुए राहुल गांधी में दूरदर्शिता की कमी होने की बात कही।सरवनन ने कांग्रेस के फैसले को रश “अहंकार” से प्रेरित बताया। सरवनन ने तंज कसते हुए कहा कि जब बीजेपी राहुल गांधी को ‘पप्पू’ कह रही थी, तब डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने ही उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि 2026 के चुनाव में जो 5 सीटें उन्होंने जीतीं, वे डीएमके के साथ गठबंधन के कारण ही संभव हो पाई है।

विजय थलपति की पार्टी टीवीके को समर्थन देकर वहां गठबंधन वाली सरकार बनाकर अब राहुल गांधी कम से कम यह तो जरूर कह सकते हैं की हालिया चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस और उसके को दो राज्यों में सरकार बनाने में सफलता मिली है। लेकिन इसके साथ ही डर इस बात का है जिस प्रकार से कांग्रेस कमेटी के अंदर से और इंडिया एयरलाइंस की तरफ से राहुल गांधी की इस चाल की आलोचना हो रही है ,उससे कहीं कांग्रेस का आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान ना हो जाए।

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