क्या कांग्रेस को एक अच्छे प्रबंधक की जरूरत है ?

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न्यूज डेस्क
जिस तरह की राजनीति देश में चल रही है और जिस तरह से देश की तमाम विपक्षी पार्टियां कांग्रेस से अपेक्षा करती नजर आ रही उससे लगता है कि कांग्रेस को एक अच्छे प्रबंधक की जरूरत है जो सभी को साथ लेकर भी आगे चले और सरकार को घेरने में सबका साथ भी ले। कांग्रेस अभी इससे चूक रही है और यह चूक पार्टी को आगे और भी परेशान कर सकती है ।

पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखें तो कांग्रेस में एक अच्छे मैनेजर की कमी दिखाई देगी। कांग्रेस के पास नया अध्यक्ष है और नेहरू गांधी परिवार के तीन सक्रिय सदस्य हैं। इनके अलावा पार्टी ने अहमद पटेल की जगह पवन बंसल को कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। जयराम रमेश के नेतृत्व में मीडिया टीम भी खूब सक्रियता से काम कर रही है। हालांकि केसी वेणुगोपाल क्या कर रहे हैं, वह किसी को पता नहीं है पर उनके रूप में कांग्रेस का एक संगठन महासचिव भी है। इसके बावजूद पार्टी राजनीति का प्रबंधन नहीं कर पा रही है।

कांग्रेस के पास कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसे पार्टी के सर्वोच्च नेता का समर्थन और विश्वास हासिल हो और वह विपक्ष के नेताओं से बात कर सके। अहमद पटेल पहले यह काम करते थे। कहीं भी मामला अटकता था तो वे सीधे फोन उठा कर किसी भी विपक्षी पार्टी के सबसे बड़े नेता से बात कर सकते थे। कांग्रेस को वैसा एक नेता चाहिए, जो विपक्ष के साथ बात कर सके। कारोबारियों से बात कर सके और जरूरत पड़ने पर मीडिया समूहों के प्रमुखों से बात कर सके। ऐसा नेता नहीं होने का नतीजा है कि संसद के बाहर और मीडिया में कांग्रेस अकेली और अलग थलग पड़ती है। संसद में विपक्षी पार्टियां जरूर कांग्रेस के साथ होती हैं लेकिन उसमें कांग्रेस के प्रबंधन का हाथ कम होता और विपक्षी पार्टियों की मजबूरी ज्यादा होती है। संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस अब भी सबसे बड़ी पार्टी है और सरकार पर दबाव बनाने के लिए हर पार्टी को उसकी जरूरत है।

लेकिन संसद से बाहर कांग्रेस अलग थलग पड़ जाती है। इसका कारण यह है कि संसद के बाहर यानी सड़क की राजनीति में विपक्षी पार्टियों को कांग्रेस की जरूरत महसूस नहीं होती है। अगर कोई प्रबंधन करने वाला अच्छा नेता होता तो विपक्ष को साध सकता था। याद करें कैसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहले राहुल गांधी की ओर से और फिर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से विपक्षी पार्टियों को चिट्ठी लिखी गई और उनको यात्रा में शामिल होने का न्योता दिया गया लेकिन एकाध को छोड़ कर सभी ने न्योता ठुकरा दिया।

इसी तरह केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला है। ईडी ने सोनिया और राहुल गांधी को बुला कर कई दिन तक पूछताछ की लेकिन कांग्रेस के समर्थन में कोई सहयोगी या दूसरी विपक्षी पार्टी नहीं उतरी। सोचें, सीबीआई और ईडी ने हाल में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया है तो कैसी हायतौबा मची है। विपक्ष की नौ पार्टियों ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर इसका विरोध किया। इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अलग से चिट्ठी लिखी। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने भी इसके विरोध में बयान जारी किया। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव तो आप नेताओं के समर्थन में है ही क्योंकि उनकी बेटी भी इसी मामले में फंसी है।

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