अचानक सिर घूमना, खड़े होने पर लड़खड़ाहट महसूस होना या ऐसा लगना कि आसपास की चीजें घूम रही हैं, ये इस तरह की समस्याएं होती हैं, जिनका सामना लगभग हर कोई करता है। हम में से कई लोग इस तरह की परेशानी को कमजोरी, थकान या लो ब्लड प्रेशर समझ लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। सीके बिड़ला हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. के.के. जिंदल का कहना है कि चक्कर आना कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और कुछ मामलों में ये किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत भी हो सकता है।
डॉ. जिंदल बताते हैं कि चक्कर आने का एक सामान्य कारण वर्टिगो है। इस स्थिति में व्यक्ति को लगता है कि उसके आसपास की चीजें घूम रही हैं या उसका शरीर हिल रहा है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। यह समस्या अक्सर कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से होती है।
इसके अलावा बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो (BPPV) भी चक्कर का कारण बन सकता है।इस स्थिति में कान के अंदर मौजूद छोटे कैल्शियम क्रिस्टल अपनी जगह से खिसक जाते हैं।ऐसे में करवट बदलने, ऊपर देखने या सिर की स्थिति बदलने पर कुछ सेकंड के लिए तेज चक्कर महसूस हो सकता है।
कई बार अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिर जाता है, जिससे ब्रेन तक रक्त का फ्लो अस्थाई रूप से कम हो जाता है और चक्कर आने लगता है।इसके अलावा शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक भूखे रहना, कुछ दवाइयों का असर और लो ब्लड शुगर भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।
कुछ लोगों को माइग्रेन के दौरान या उससे पहले चक्कर आने और बैलेंस बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार ऐसा बिना तेज सिरदर्द के भी हो सकता है।इसलिए बार-बार चक्कर आने की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डॉ. जिंदल का कहना है कि हर चक्कर किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर अचानक चक्कर आने के साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो सावधान हो जाना चाहिए, जैसे-
चलने या खड़े होने में परेशानी होना।
शरीर के एक तरफ अचानक कमजोरी या सुन्नपन होना।
चेहरे का एक तरफ झुक जाना।
बोलने या बात समझने में दिक्कत आना या डबल दिखना।
अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना।
ऐसी स्थिति में स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या की आशंका हो सकती है ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

