न्यूज़ डेस्क
भारत के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को जैसे ही असम के लिए संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए अंतिम आदेश की घोषणा की असम की राजनीति गर्म हो गई। कई दलों में घबराहट शुरू हुई और विरोध के स्वर भी उठने लगे। लेकिन विरोध का स्वर सबसे तेज एजीपी विधायक की तरफ से उठे। असम में बीजेपी की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद् यानी एजीपी है लेकिन एजीपी के दिग्गज नेता प्रदीप हजारिका इस परिसीमन को लेकर आहात हैं। उन्होंने इसका विरोध किया और तत्काल पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष अतुल बोरा को भी भेज दिया है।
प्रदीप हजारिका शिवसागर जिले के अमगुरी निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार विधायक हैं। वह पार्टी के दिग्गज नेता थे और उनके पार्टी छोड़ने का फैसला एजीपी के लिए एक बड़ा झटका है। शनिवार रात एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा को लिखे एक पत्र में, विधायक हजारिका ने ऊपरी असम के राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिवसागर जिले में अमगुरी निर्वाचन क्षेत्र के महत्व को कम करने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिसका वह लगभग चार दशकों से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
प्रदीप हजारिका ने एजीपी अध्यक्ष अतुल बोरा को लिखे अपने त्याग पत्र में कहा कि मेरे लिए, अमगुरी सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं है। यह मेरे राजनीतिक करियर के लिए शुरुआती बिंदु और प्रेरणा दोनों के रूप में कार्य करता है। हजारिका ने कहा, एजीपी, एक पार्टी, असम राज्य सरकार के सत्तारूढ़ गठबंधन का सदस्य होने के दौरान अमगुरी जैसी ऐतिहासिक सीट को कमजोर होने से रोकने में विफल रही, जिस कारण मेरे क्षेत्र के निवासियों में उसके खिलाफ नाराजगी है।
बता दें कि एजीपी ने आम तौर पर परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन किया है। लेकिन देखने की बात यह है कि एजीपी के साथ जुड़े और नेता क्या कदम उठाते हैं ? इसके साथ ही असम की की कई और भी पार्टियां परिसीमन के खिलाफ है। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में असम में परिसीमन का मामला और भी जटिल हो सकता है।

