दिल्ली जिमखाना क्लब पर ताला,एक आदेश से हिल गया रसूखदारों का ठिकाना

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दशकों तक नई दिल्ली के केंद्र में स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब जो कि शुरुआत में खेल और खेल में रूचि रखने वलों के लिए बना था…परंतु धीरे धीरे दिल्ली की सत्ता, नौकरशाही और हाई सोसाइटी का प्रतीक बन गया।आज कल यह इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि इस समय यहां से वित्तीय घोटाले और देश के साथ षड्यंत्र करने की बु आ रही है। केंद्र सरकार ने जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने को कहा है। सरकार ने कहा है कि 27.3 एकड़ का यह भूखंड ‘‘रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित’’ करने के लिए आवश्यक है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या सरकार किसी भी भवन या संस्थान को ऐसे खाली करने कि लिए कह सकती है और क्या-क्या कारनामे हुए हैं इस क्लब के सदस्यों के द्वारा।

लगभग 113 साल पहले शुरु हुए दिल्ली जिमखाना क्लब के मेंबर रहने वाले ही जानते होंगे कि इस क्लब का मेंबर होना कितनी बड़ी बात थी। मेंबर बनने के लिए 30 साल से ज्यादा की लंबी प्रतीक्षा सूची थी और दावेदारों में एक से बढ़ एक नेता मंत्री और हजारों रसूखदार। पर साल में लगभग 100 लोगों को ही मेंबरशिप मिलती थी। लेकिन अब ये हाई-प्रोफाईल क्लब परिसर को खाली किए जाने पर…केंद्र सरकार के नोटिस को लेकर भयंकर विवाद पैदा हो गया है। यह इलाका प्रधानमंत्री आवास और कई संवेदनशील सरकारी परिसरों के बेहद करीब है। केंद्र सरकार ने क्लब प्रबंधन को नोटिस जारी कर कहा है कि जिस सरकारी जमीन ( कुल 27.3 एकड़) पर क्लब चल रहा है, उसकी अब राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कार्यों के लिए जरूरत है।

इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू इसका कानूनी पक्ष है। यह सिर्फ एक क्लब को खाली कराने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी जमीन, सार्वजनिक हित और संस्थागत अधिकारों के टकराव का उदाहरण बन गया है।
– सरकार का कहना है कि देश की राजधानी दिल्ली के केंद्र में इतनी बड़ी और इतनी प्राइम सरकारी जमीन का उपयोग सीमित और एक खास वर्ग के ही क्लब के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक उपयोग का सवाल हो। ऐसे में यदि यह मामला अदालत में जाता भी है तो अक्सर देखा गया है कि जब सार्वजनिक हित और निजी संस्थागत हित में टकराव होता है, तो न्यायालय सार्वजनिक हित को ही प्राथमिकता देते हैं।

जैसी कि सूचना है, दिल्ली जिमखाना क्लब जिस 27 एकड़ के आसपास की जमीन पर बना है, वह सरकार की लीज पर दी गई जमीन है। यानी जमीन का मालिकाना हक केंद्र सरकार के पास है। यदि सरकार यह साबित कर दे कि क्लब ने लीज की शर्तों का उल्लंघन किया है तो सरकार के पास लीज समाप्त करने का अधिकार हो जाता है। कानूनी रूप से यह मामला “लीज टर्मिनेशन” और “पब्लिक प्रॉपर्टी रिक्लेमेशन” के दायरे में आता है।

दिल्ली जिमखाना क्लब एक कंपनी के रूप में भी रजिस्टर्ड है। क्लब के संचालन में कथित गड़बड़ियों की खबरें आई थीं। ऐसे में Companies Act, 2013 की धारा 241 और 242 से जुड़ा मामला माना जा रहा है। इनके जरिए सरकार को किसी संस्था के संचालन में हस्तक्षेप का अधिकार मिलता है यदि वहां कुप्रबंधन या सार्वजनिक हित को नुकसान होने की आशंका हो। साल 2021 में National Company Law Appellate Tribunal ने भी दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर अच्छी टिप्पणियां नहीं की थी। NCLT ने माना था कि क्लब के मामलों में जन हित प्रभावित हो सकता है।

“defence infrastructure” और जन सुरक्षा का हवाला देकर राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला जोड़ दिया है। भारतीय कानून में जब राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा सामने आता है, तो अदालतें सामान्यतः सरकार को व्यापक अधिकार देती हैं। ऐसे बिंदुओं को देखते कहा जा सकता है कि मामले में सरकार की स्थिति कानूनी रूप से मजबूत है।

क्लब प्रबंधन के पास कानूनी विकल्प अभी भी खुले हैं। यदि उसे लगते हैं कि सरकार मनमानी कर रही है तब वह अदालत की शरण में जा सकता है। यदि अदालत को लगे कि उचित सुनवाई या उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो सरकार की कार्रवाई पर रोक भी लग सकती है।

कुछ रिपोर्ट्स (जैसे पूर्व सीआईए एजेंट रॉबर्ट बेयर की आत्मकथा का हवाला देने वाली मीडिया रिपोर्ट्स) में दावा किया गया है कि शीत युद्ध के दौरान, जब दिल्ली के अन्य स्थानों पर कड़ी निगरानी होती थी, तब विदेशी जासूस इस क्लब का इस्तेमाल स्थानीय उच्च-वर्ग की पहुंच का फायदा उठाकर भारत की सैन्य और रक्षा संबंधी जानकारियां हासिल करने के लिए करते थे।

दिल्ली पुलिस द्वारा क्लब के खिलाफ एक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है।यह मामला अति-संवेदनशील प्रधानमंत्री आवास (PM Residence) क्षेत्र में अवैध ड्रोन उड़ाने और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।
वित्तीय घोटाला और अनियमितताएं: कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) द्वारा की गई जांच में भारी वित्तीय अनियमितताओं, धन के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ है।क्लब पर लगभग ₹50 करोड़ का भ्रष्टाचार करने और लोगों से अवैध रूप से सार्वजनिक धन जमा करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

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