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दिल्ली बिल पर आज चर्चा के लिए भाजपा ने अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार को लगातार दूसरे दलों का समर्थन मिल रहा है। पहले इस बिल पर आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया था, वहीं, मंगलवार को उड़ीसा के सत्तारूढ़ दल बीजू जनता दल ने सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र सरकार संशोधन विधेयक-2023 पेश किया। वह जब इस विधेयक को पेश कर रहे थे, तब विपक्षी दल जोरदार हंगामा कर रहे थे। हंगामे और नारेबाजी के बीच इस विधेयक को पेश किया गया। वहीं, विधेयक पर आज चर्चा होगी। ये विधेयक कुछ महीनों पहले जारी अध्यादेश की जगह लेगा। मौजूदा विधेयक में कुछ बदलाव भी किए गए हैं।
बिल पर चर्चा शुरू होने से पहले ही राज्यसभा से अनुचित व्यवहार करने के लिए पूरे सत्र के लिए निलंबित पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भविष्यवाणी किया कि दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में गिर जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है। वहीं, सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अपमान बताया था।
अध्यादेश के मुद्दे परवाईएसआर ग्रेस और बीजू जनता दल के केंद्र सरकार का साथ देने के सवाल पर पार्टी के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने कुछ मजबूरियों के कारण यह फैसला लिया होगा। जो लोग इस बिल का समर्थन करेंगे उन्हें राष्ट्र-विरोधी के रूप में याद किया जाएगा। हम भारत के संविधान को बचाने के लिए लड़ेंगे।
वहीं, इस मुद्दे पर बीजू जनता दल (बीजद) ने सरकार का समर्थन किया है। पार्टी सांसद पिनाकी मिश्रा ने कहा कि केंद्र को दिल्ली के संबंध में कानून बनाने का अधिकार है। पार्टी ने अपने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को सरकार के समर्थन में वोट डालने के लिए व्हिप जारी किया है। अगर हम लोकसभा में संख्या गणित की बात करे तो बिल को पास होने से कोई नहीं रोक सकता। भाजपा के अकेले 301 सदस्य, जबकि राजग को 330 से अधिक सदस्य हैं। वहीं, लोकसभा में किसी भी बिल को पास करने के लिए 272 सांसदों की जरूरत होती है।

