Homeदेशमणिपुर में तनाव बढ़ाने के लिए नहीं कर सकते सुप्रीम कोर्ट का...

मणिपुर में तनाव बढ़ाने के लिए नहीं कर सकते सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल, शीर्ष अदालत की तीखी टिप्पणी

Published on

बीरेंद्र कुमार झा

मणिपुर में बीते 2 महीने से जारी हिंसा के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीखी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि मणिपुर में हिंसा बढ़ाने के मंच के रूप में कोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि हिंसा खत्म करने के लिए हम कानून एवं व्यवस्था के तंत्र को अपने हाथ में नहीं ले सकते।चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्मा की पीठ ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा अथॉरिटीज को स्थिति को बेहतर बनाने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके लिए उसे विभिन्न समूहों से मदद लेने का सकारात्मक सुझाव की जरूरत होगी।

मणिपुर हिंसा को लेकर सॉलिसिटर जनरल ने मांगा था निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सरकार के चीफ सेक्रेटरी की ओर से दाखिल स्टेट्स रिपोर्ट को पढ़ने के बाद यह बात कही। उसने मणिपुर ट्राइबल ग्रुप की ओर से दायर याचिका पर कहा कि हमें स्थिति को बेहतर बनाने के लिए मंगलवार तक कुछ सकारात्मक सुझाव दीजिए और हम केंद्र और मणिपुर सरकार से इस पर गौर करने के लिए कहेंगे।शीर्ष न्यायालय ने मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जून में जारी एक सर्कुलर पर निर्देश देने को कहा जिसमें उसने राज्य सरकार के कर्मचारियों को ड्यूटी पर उपस्थित होने या वेतन में कटौती का सामना करने के लिए कहा था।

उच्चतम न्यायालय ने 3 जुलाई को मणिपुर सरकार को आदेश दिया था कि वह राज्य में जाति हिंसा के शिकार लोगों के पुनर्वास और अन्य सेवाओं पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। राज्य में तीन मई को मैतेई समुदाय को भी आदिवासी का दर्जा दिए जाने के सुझाव को लेकर हिंसा भड़क उठी थी। यह सुझाव हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में दिया था, जिस पर कुकी समुदाय के लोगों को आपत्ति है। 3 मई को अदालत के फैसले के खिलाफ कुकी समाज के लोगों का मार्च था। इसी दौरान दोनो पक्षों के आमने सामने आने से विवाद बढ़ गया।

सौ से भी ज्यादा लोगों की इस हिंसा में जा चुकी है जान

मैतेई और कुकी का विवाद देखते ही देखते हिंसा में तब्दील हो गया।राज्य के अलग-अलग इलाकों में इसे लेकर खूब बवाल मचा। अब तक हिंसा में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है ।सैकड़ों लोग हिंसा की विभिन्न घटनाओं में घायल भी हो चुके हैं ।मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53%प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि जनजातीय नागा और कुकी आबादी वादी का हिस्सा 40% है और वे पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

 

Latest articles

रैपर से नेता बने बालेन शाह की RSP नेपाल में भारी जीत की ओर

नेपाल के रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की मध्यमार्गी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP)...

JDU में शामिल होते ही नीतीश कुमार से मिले निशांत, पिता को खिलाई सोनपापड़ी

  बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला ह. लंबे समय तक बिहार...

UTS ऐप बंद होने पर फंसी यात्री,आपकी ट्रेन न छूटे इसलिए दूसरे ऐप पर हो जाएं शिफ्ट

1 मार्च से रेलवे की UTS ऐप बंद हो चुकी है, जिसके चलते मीनू...

क्या 150 साल तक जिंदा रह सकता है इंसान? इस रिसर्च के बाद शुरू हुई बहस

मानव जीवन को लंबा करने का विचार लंबे समय से साइंटिस्ट को आकर्षित करता...

More like this

रैपर से नेता बने बालेन शाह की RSP नेपाल में भारी जीत की ओर

नेपाल के रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की मध्यमार्गी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP)...

JDU में शामिल होते ही नीतीश कुमार से मिले निशांत, पिता को खिलाई सोनपापड़ी

  बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला ह. लंबे समय तक बिहार...

UTS ऐप बंद होने पर फंसी यात्री,आपकी ट्रेन न छूटे इसलिए दूसरे ऐप पर हो जाएं शिफ्ट

1 मार्च से रेलवे की UTS ऐप बंद हो चुकी है, जिसके चलते मीनू...