लगातार स्क्रीन टाइम से बिगड़ती है स्लीप साइकिल, कर लें सुधार वरना हो जाएगा नुकसान

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आज के समय में ज्यादातर लोगों की जिंदगी मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के आसपास ही घूमती है। खासकर ऑफिस में काम करने वाले लोग सुबह से शाम तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं। काम खत्म होने के बाद भी दिमाग को आराम नहीं मिलता, क्योंकि घर पहुंचकर हाथ में फिर मोबाइल आ जाता है। कोई सोशल मीडिया देखता है, कोई वीडियो देखता है तो कोई देर रात तक चैट करता रहता है।

धीरे-धीरे यही आदत शरीर को अंदर से थकाने लगती है। इंसान को लगता है कि वह बस फोन चला रहा है, लेकिन उसकी आंखें और दिमाग लगातार काम कर रहे होते हैं। यही वजह है कि रात को जल्दी नींद नहीं आती और सुबह उठते ही शरीर टूटा-टूटा सा महसूस होता है। कई लोग इसे छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही खराब आदत आगे चलकर बड़ी परेशानी बन जाती है।

मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट हमारे दिमाग को यह एहसास कराती है कि अभी दिन है। ऐसे में शरीर ठीक से “स्लीप मोड” में नहीं जा पाता। आमतौर पर रात के समय शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है। हालांकि, जब सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखी जाती है तो यह हार्मोन कम बनने लगता है। यही कारण है कि इंसान बिस्तर पर लेट तो जाता है, लेकिन देर तक करवटें बदलता रहता है। लगातार ऐसा होता रहता है तो इससे शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता, जिससे अगले दिन सिर भारी लगना, आंखों में जलन होना और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होना आम बात बन जाती है।

अगर आप भी देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत से परेशान हैं, तो कुछ आसान बदलाव से आप अपने आप की मदद कर सकते है, जैसे कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन और लैपटॉप से दूरी बना लें।रात में हल्की रोशनी रखें और बेवजह सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से बचें। इसके अलावा अगर काम की वजह से पूरा दिन स्क्रीन पर बिताना पड़ता है, तो बीच-बीच में आंखों को आराम देना बहुत जरूरी होता है। हर 20 से 30 मिनट बाद कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाएं। साथ ही सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या परिवार के साथ थोड़ा समय बिताना भी दिमाग को शांत करता है।याद रखिए, अच्छी नींद सिर्फ आराम नहीं देती, बल्कि पूरे शरीर को नई ताकत भी देती है।इसलिए हर डॉक्टर यही सलाह देता है कि हर आदमी को एक दिन में 7 से 8 घंटे कि नींद लेनी ही चाहिए। ऐसे में आज ही अपनी स्लीप साइकिल को सुधारना शुरू करें, वरना छोटी सी लापरवाही धीरे-धीरे आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है।

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