अखिलेश अखिल
वैसे तो देश के हर राज्यों में बहुत सी पार्टियां ऐसी है जिसका कोई राजनीतिक जनाधार नहीं है लेकिन ये पार्टियां हर चुनाव में शिरकत करती है। पहले ऐसी पार्टियां कालाधन को सफ़ेद करने का काम करती थी लेकिन अब कुछ नए कानून बन जाने की वजह से ऐसी पार्टियों के कारोबार बदल से गए हैं। अब ये पार्टियां कुछ हजार ,पांच हजार या दस हजार वोट तक काटने का डर पैदा करती है और सामने वाले दल को डराती है और कुछ समझौता भी करती है। हालांकि बदली राजनीति में बटमार छोटी पार्टियों की महत्ता अब कम हो गई है लेकिन अभी देश में दो ऐसी पार्टी है जिनका जनाधार लगातार बढ़ता जा रहा है। इन पार्टयों में शुमार है केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और ओवैसी की पार्टी। केजरीवाल दिल्ली की राजनीती करते रहे और फिर उनकी पार्टी पंजाब में भी सत्तासीन हो गई। गोवा में भी पहुँच गई और गुजरात में भी पहुँच गई। कुछ सीटे पायी और एक वोट बैंक भी तैयार कर लिया।
ओवैसी की पार्टी की भी यही स्थिति है। हैदराबाद से निकली यह पार्टी महाराष्ट्र में भू उपस्थित है और बिहार में भी। पिछले बिहार चुनाव में सीमांचल के इलाके में पांच सीटों पर जीत हासिल हो गई थी। ओवैसी काफी खुश हुए थे। लेकिन बाद में चार विधायक राजद में चल गए। लेकिन ओवैसी की पहचान सीमांचल इलाके में हो गई है। अब जब भी चुनाव होंगे ओवैसी ताल ठोकेंगे। कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भी ओवैसी बिहार में कुछ उम्मीदवार उतारने को तैयार है।
लेकिन मौजूदा समय में आप और ओवैसी से कांग्रेस कुछ ज्यादा ही परेशान है। हालांकि परेशान तो बीजेपी भी है लेकिन अब तक जो चुनावी परिणाम सामने आये हैं कि इन दोनों पार्टियों की ही लाभ हुआ है। यही वजह है कि विपक्ष हमेशा इन दोनों पार्टियों को बीजेपी की बी टीम भी कहता रहा है।
अब ये दोनों पार्टियां मध्यप्रदेश ,छत्तीसगढ़ ,तेलंगाना ,राजस्थान और कर्नाटक में भी चुनावी मुनादी करती नजर आ रही है। दोनों नेता बड़े स्तर पर चुनावी तैयारी कर रहे हैं और जनता के बीच पहुँच भी रहे हैं। कांग्रेस की परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है।
दरअसल, ये दोनों ही पार्टी राजनीति में वोट कटुवा का काम करती हैं। इन्हें खुद को ज़्यादा कुछ नहीं मिलता। दूसरी बड़ी पार्टियों को ये अच्छा- ख़ासा नुक़सान और फ़ायदा करवाती हैं। अगर आप को याद हो तो गुजरात में यही हुआ था। ज़ोर- शोर से आप पार्टी गुजरात के चुनाव मैदान में उतरी थी। खूब हल्ला मचाया। खूब पब्लिसिटी पाई। आप पार्टी को आख़िरकार ज़्यादा कुछ नहीं मिला लेकिन कांग्रेस की खाट खड़ी हो गई और भाजपा की पौ बारह। इतिहास में गुजरात की किसी पार्टी को जितनी सीटें नहीं मिलीं, उतनी पर भाजपा की विजय हुई।
अब आप पार्टी मध्यप्रदेश पहुँच गई है। वहाँ वह क्या करेगी कोई नहीं जानता लेकिन कांग्रेस के वोट कटेंगे इसकी संभावना बढ़ती जा रही है। अभी तक मध्यप्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही मुकाबला होता रहा है। कुछ इलाकों में बीएसपी की पहुँच है और वह चुनाव जीतती भी रही है ,इसके साथ ही कुछ स्थानीय पार्टियां भी चुनाव लड़ती है। लेकिन आप की उपस्थिति से कांग्रेस का भय ज्यादा ही सता रहा है। पिछले दिनों भोपाल पहुंचे केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने जो कहा उससे कांग्रेस ज्यादा ही गंभीर हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभा करके कहा था- मध्यप्रदेश में सरकारें बेची और खरीदी जाती हैं। यहां विधायक की खरीदी-बिक्री पर डिस्काउंट भी मिलता है।
आप पार्टी इन चुनावी राज्यों में खूब हवा बना रही है। हवा भी ऐसी कि मानो उसकी सरकार बन रही है। लेकिन वह सरकार तो बनाती नहीं कांग्रेस को जमींदोज कर जाती है। गोवा और गुजरात इसके हालिया उदहारण है। अब आप और ओवैसी सभी चुनावी राज्यों में दौर रहे हैं। ओवैसी ने राजस्थान में 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है। ये वही सीटें हैं जो मुस्लिम बहुल है और इन सीटों पर अकसर कांग्रेस की जीत होती रही है। अब ओवैसी के पहुँचने के बाद गहलोत की परेशानी बढ़ती जा रही है। आप भी राजस्थान में चुनाव लड़ेगी। ये दोनों पार्टियां छत्तीसगढ़ ,तेलंगाना और कर्नाटक में भी पैतरा डाल रही है और काफी लोग इन पार्टियों से मिल भी रहे हैं।
छोटी पार्टियों की उपस्थिति भाजपा के लिए हमेशा फ़ायदेमंद साबित होती है। राजनीति में अब यही खेल चल रहा है। कांग्रेस के पास चुनावी खेल कम ही रह गए हैं। राजनीति के मैदान में ऐसे खिलाड़ी हैं ही नहीं जो अपनी उपस्थिति से भाजपा को गच्चा दे सकें। यह सब वोट बैंक की तासीर पर निर्भर करता है। कांग्रेस के वोट बैंक की तासीर आप और ओवेसी के वोट बैंक से काफ़ी मिलती है। इसलिए ये दोनों कांग्रेस के ही वोट काटती हैं। भाजपा के नहीं।

