बीरेंद्र कुमार झा
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ सचिन पायलट का एकदिवसीय अनशन तो11 अप्रैल को ही समाप्त हो गया, लेकिन इसके साथ ही राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर से घमासान शुरू हो गया है। घटना के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का विवाद फिर से तेजी से गहराता नजर आ रहा है वहीं दूसरी तरफ सचिन पायलट के इस अनशन से नाराज कांग्रेस पार्टी के आला अधिकारी सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गए हैं।
रिपोर्ट के आधार पर सचिन पायलट पर होगी कार्रवाई: रंधावा
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के अनशन के 1 दिन बाद बुधवार को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान रंधावा लगभग आधा घंटे तक खड़गे आवास में रहे और उनसे पायलट के अनशन के संदर्भ की चर्चा की । प्राप्त जानकारी के अनुसार रंधावा इस घटना पर सभी पक्षों की गलती को आधार बनाते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मलिकार्जुन खरगे को सौंपेंगे जिसके आधार पर इस मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।
सचिन पायलट का तरीका गलत: रंधावा
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रंधावा ने कहा कि सचिन पायलट ने भ्रष्टाचार के जिस मुद्दे को उठाया है,मैं उसे सहमत हूं ,लेकिन उनका तरीका गलत था।उन्हें इस मुद्दे को विधानसभा में उठाना चाहिए था। उन्होंने कहा मैं सभी चीजों का विश्लेषण करूंगा और एक रिपोर्ट तैयार करूंगा कि गलती किसकी है।सचिन पायलट ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की, मुझे नहीं लगा कि यह पार्टी का यह पार्टी के समर्थन में था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सचिन पायलट ने किया था एकदिवसीय अनशन
गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मंगलवार 11 अप्रैल को राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में कार्यवाही की मांग को लेकर जयपुर में एक दिवसीय अनशन किया था। हालांकि पार्टी ने उन्हेंअनशन पर बैठने से मना किया था। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने पायलट को चेतावनी देते हुए कहा था कि उनके इस तरह के कदम को पार्टी विरोधी माना जाएगा।
सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि उन्होंने पिछले साल इस मुद्दे पर अशोक गहलोत को 2 पत्र लिखे थे, लेकिन किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।पायलट ने कहा कि हमने लोगों को आश्वासन दिया था कि बीजेपी के पूर्ववर्ती सरकार में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।मैं चाहता था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले में कार्रवाई करें लेकिन 4 वर्षों में ऐसा नहीं हुआ।
2018 से जारी है गहलोत और पायलट के बीच तकरार
गौरतलब है कि सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच का विवाद 5 साल पुराना है।2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत हासिल करने के बाद गहलोत और पायलट दोनों ही मुख्यमंत्री पद पर काबिज होने के इच्छुक थे, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत को तीसरी बार इस शीर्ष पद के लिए चुन लिया।इसके बाद जुलाई 2020 में पायलट और कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की मांग करते हुए गहलोत के खिलाफ खुले तौर पर विद्रोह कर दिया था,जिसके बाद सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दोनों ही पदों से हटा दिया गया था। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से आश्वासन मिलने के बाद महीने भर जारी रहा यह संकट समाप्त हो गया था। हालांकि इस दौरान अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के लिए गद्दार, नकारा और निकम्मा जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी किया था, और उन पर बीजेपी नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने की बीजेपी की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था।

