बीरेंद्र कुमार झा
देश में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ करने की दिशा में कदम आगे बढ़ते जा रहे हैं।पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित हाई लेवल कमिटी ने नई दिल्ली में अपनी पहली बैठक की। इस दौरान इस मुद्दे पर सुझाव देने के लिए राजनीतिक दलों और विधि आयोग को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया। एक बयान में यह जानकारी दी गई है।सरकार ने लोकसभा राज्य विधानसभाओं और नगर निकायों और पंचायतों के चुनाव एक साथ करने के मुद्दे पर सिफारिश करने के वास्ते 2 सितंबर को 8 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित करने के संबंध में अधिसूचना जारी की थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल,राज्यसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप और पूर्व सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी बैठक में मौजूद थे सीनियर वकील हरीश साल्वे ऑनलाइन तरीके से बैठक में शामिल हुए।बयान में कहा गया कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी बैठक में मौजूद नहीं थे। अधीर रंजन चौधरी ने हाल में गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र में इस समिति का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था। अधीर रंजन चौधरी ने अपने पत्र में कहा था कि मुझे उस समिति में काम करने से इनकार करने में कोई दिक्कत नहीं है,जिसकी संदर्भ शर्तें इसके निष्कर्ष की गारंटी के लिए तैयार की गई है।यह पूरी तरह से एक छलावा है।
सुझाव देने के लिए आमंत्रित करने का फैसला
बयान में कहा गया कि समिति ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों, राज्यों में सत्तारूढ़ दलों,संसद में अपना प्रतिनिधित्व रखने वाले दलों और अन्य मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों को देश में एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर सुझाव देने के लिए आमंत्रित करने का फैसला लिया है। विधि मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि समिति एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर अपने सुझाव के लिए विधि आयोग को भी आमंत्रित करेगी। सरकार की अधिसूचना में कहा गया कि समिति तुरंत ही कामकाज शुरू कर देगी और जल्द से जल्द सिफारिश करेगी, लेकिन रिपोर्ट सौंपे पर जाने की समय सीमा तय नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक राष्ट्र एक चुनाव की वकालत करते रहे हैं और उनका कहना है कि इससे देश का बहुत सारा पैसा और संसाधन बचेंगे।
इससे सरकारी खजाने की होगी बचत
सरकार ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करने की वकालत करते हुए संसद में कहा कि इससे सरकारी खजाने की बचत होगी। समिति पड़ताल करेगी और संविधान, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, वह एक साथ चुनाव कराने के उद्देश्य के लिए अन्य नियमों और कानूनों में संशोधन की जरूरत पर विशेष सिफारिश करेगी।संविधान में कुछ विशेष संशोधन करने के लिए 50% राज्य विधानसभाओं से अनुमोदन की जरूरत होती है। समिति एक साथ चुनाव कराने पर त्रिशंकु सदन, अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किए जाने या दलबदल जैसी स्थिति उभरने पर भी गौर करेगी और सिफारिश करेगी।
कॉमन वोटर लिस्ट से मिलेगी कई सुविधाएं
संसद की एक समिति ने हाल में कहा था कि एक साझा मतदाता सूची खर्च घटाने में मदद करेगी और एक ऐसे कार्य पर मानव संसाधनों को तैनात करने से रोकेगी जिस पर दूसरी एजेंसी पहले से ही काम कर रही है। निर्वाचन आयोग को संसदीय और विधानसभा चुनाव कराने का अधिकार है। राज्य निर्वाचन आयोग को स्थानीय निकाय चुनाव कराने का अधिकार है। मूल प्रस्ताव लोकतंत्र के तीनों स्तरों लोकसभा के 543 संसद, विधानसभा के 4120 विधायक और पंचायत व नगर पालिकाओं 30 लाख सदस्यों के लिए एक साथ चुनाव कराने का है ।समिति की अधिसूचना जारी होने के बाद अमित शाह और अर्जुन मेघवाल ने कोविंद से मुलाकात भी की थी। सूत्रों के अनुसार कोविंद के साथ की गई यह मुलाकात एक शिष्टाचार मुलाकात थी।

