नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात की मांग स्वीकार नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 12 अक्टूबर को मुलाकात के लिए समय मांगा था। वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित चुनावी अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
CJI ने मुलाकात से क्यों किया इनकार?
रिपोर्टों के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को अपने फैसले की वजह बताई। उनका कहना था कि जिन विषयों पर चर्चा की मांग की गई है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन के जरिए निर्देश देना उचित नहीं होगा।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत अदालत सरकार के प्रशासनिक कामकाज में इस तरह हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालांकि, विपक्षी नेता अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल कर सकते हैं। संबंधित मामलों की सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित होने की जानकारी भी सामने आई है।
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का किया था ऐलान
CJI से मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें उन्होंने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना की जानकारी दी थी।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होगा। उन्होंने विपक्षी दलों, युवाओं, नागरिक समाज और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की।
उनकी ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में कथित ‘वोट चोरी’ पर रोक, SIR प्रक्रिया को रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है। विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों को संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का भी मामला
दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों, बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने संबंधित प्रतिबंधों और आवाजाही से जुड़ी परिस्थितियों पर प्रशासन से जवाब मांगा था। इस मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के निर्देशों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि विपक्षी दल SIR तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
CJI की ओर से मुलाकात का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद विपक्षी नेताओं के सामने न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपनी मांगें रखने का विकल्प मौजूद है। संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान यदि कोई नई याचिका दाखिल की जाती है, तो उसे अदालत नियमों और प्रक्रिया के अनुसार देख सकती है।
फिलहाल, इस घटनाक्रम के केंद्र में तीन मुद्दे हैं—SIR प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्ति, मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठाई गई मांगें और दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई। आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से स्पष्ट होगी।

