झारखंड में राज्यपाल परिवर्तन, एक सामान्य प्रक्रिया या राजनीति

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  • बीरेंद्र कुमार झा

केंद्र सरकार ने हाल में जिन राज्यों में राज्यपाल बदले हैं,उसमें झारखंड भी एक है।झारखंड में राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे रमेश बैस को यहां से स्थांतरित करते हुए महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है,जबकि झारखंड में सी पी राधाकृष्णन (C P. Radhakrishnan) को राज्यपाल बनाया गया है।

कौन हैं सी पी राधाकृष्णन

सी पी राधाकृष्णन तमिलनाडु के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं।वे बीजेपी कार्यकारिणी के सदस्य हैं।वे दो बार कोयंबटूर से लोक सभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे। वे तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी है रह चुके हैं।दक्षिण भारत में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। वे केरल के प्रभारी भी रहे हैं। ये राष्ट्रीय सेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं। बीजेपी में आने वाले वे जनसंघ के जमाने के नेता हैं।

झारखंड की राजनीति पर राज्यपाल परिवर्तन का असर

झारखंड में रमेश बैस की जगह सीपी राधाकृष्णन का राज्यपाल बनना संवैधानिक दृष्टिकोण से भले ही एक सामान्य प्रक्रिया हो, लेकिन झारखंड की राजनीति में इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। झारखंड में इससे पूर्व रमेश बैस राज्यपाल थे।राज्यपाल रमेश बैस ने हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार के द्वारा भेजे गए कई विधायकों को वापस लौटा दिया था।इसमें सबसे चर्चित 1932 के खतियान आधारित विधेयक भी था।इसके अलावा हेमंत सोरेन की विधायकी रद्द करने से संबंधित चुनाव आयोग के एक लिफाफे के आने की बात कह कर, समय-समय पर उसे लेकर टिप्पणी कर,वे खासे चर्चित हुए थे। उनके इस दवाब से हेमंत सोरेन की सरकार कई ऐसे निर्णय लेने लगी थी जिसका दूरगामी प्रभाव इनकी अपनी ही सरकार पर पड़ना तय था।मुख्यमंत्री की कुर्सी न चली जाए इस डर से अपने मंत्रियों और गंठबंधन के विधायकों की इधर से उधर घुमाने की वजह से भी हेमंत सोरेन सरकार की स्थिति काफी हास्यासपद बन गई थी। इस सबका लाभ बीजेपी को आगामी लोक सभा और झारखंड विधान सभा चुनाव में मिलेगा।वहीं दूसरी तरफ हेमंत सोरेन अपनी हर सभाओं में राज्यपाल रमेश बैस को बीजेपी का एजेंट बताकर लोगों की सहानुभूति जुटाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन रमेश बैस के झारखंड से स्थानांतरित होकर महाराष्ट्र का राज्यपाल बन जाने के बाद हेमंत सोरेन इन मुद्दों को नहीं उठा पाएगी और सारा लाभ बीजेपी उठा ले जाएगी।

तमिलनाडु की राजनीति पर प्रभाव

सी पी राधाकृष्णन को झारखंड का राज्यपाल बन दिये जाने से तमिलनाडु में दो नेताओं के मतभेद को भी किया दूर किया जा सकेगा।पूर्व लोकसभा सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सी पी राधाकृष्णन के तमिलनाडु इकाई से बाहर होने से प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई की स्थिति मजबूत हो सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सीपी राधाकृष्णन के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के साथ ‘मतभेद’ थे और उनकी कार्यशैली को लेकर ‘शिकायत’ थी। अन्नामलाई के काम करने और राज्य इकाई का नेतृत्व करने के तरीके से भाजपा नेतृत्व काफी खुश है। कर्नाटक चुनाव के लिए अन्नामलाई को सह-प्रभारी नियुक्त करने का नेतृत्व का कदम इसका एक संकेत है। घटनाक्रम से परिचित एक पार्टी नेता ने कहा कि बीजेपी के इस वफादार और प्रतिबद्ध पार्टी कार्यकर्ता राधाकृष्णन के झारखंड का राज्यपाल बन दिए जाने से अब वे शांत हो जायेंगे और पार्टी बिना किसी मतभेद के तमिलनाडु में पूरे ज़ोर से अपनी स्थिति मजबूत कर आगामी लोक सभा चुनाव में प्रभावशाली स्थिति बनाएगी।

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) शिवाजी को लेकर दिए गए एक बयान की वजह से महाराष्ट्र के हर एक दल के निशाने पर आ गए थे। ऐसे में उनके राज्यपाल के रूप में महाराष्ट्र में रहने से भारतीय जनता पार्टी के लिए आगामी चुनाव में नए गठबंधन बनाने के साथ-साथ वर्तमान में शिवसेना को तोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बनाई गई गठबंधन की सरकार पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता था।इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र की बीजेपी सरकार ने झारखंड में अपनी राजनीतिक कौशल और सूझबूझ का प्रदर्शन करते हुए वहां की सत्ताधारी दल को साधने में सक्षम रहने वाले राज्यपाल रमेश बैस को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनवा दिया। रमेश बैस के महाराष्ट्र के राज्यपाल बन जाने से भारतीय जनता पार्टी के समक्ष उत्पन्न हुई यह असहज स्थिति स्वता समाप्त हो जाएगी और भारतीय जनता पार्टी के लिए वहां आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपने अनुकूल वातावरण बनाने का मौका मिलेगा।

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