महाराष्ट्र में सियासी जमीन  तलाश रहे केसीआर ने शिंदे सरकार को घेरते हुए कांग्रेस पर किया अटैक !

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अखिलेश अखिल 
मौजूदा समय में जब देश की राजनीति दो गठबंधन के बीच नाच रही है ऐसे में कुछ ऐसे भी नेता है जो आज भी निर्गुट होकर ही अपनी लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। नवीन पटनायक ,केसीआर ,मायावती ,जगन रेड्डी कुछ ऐसे  जिनकी अपनी राज्यों में मजबूत पकड़ है और लगातार सत्ता में बने हुए भी हैं। इन चेहरों में  ही है जो पूर्व मुख्यमंत्री है लेकिन उनका वोट बैंक भले ही कम हो गया हो ,आज भी दलितों की बड़ी नेता है। आगामी चुनाव में इन नेताओं की हैशियत क्या होगी यह तो देखने की बात है लेकिन इनचेहरों में से केवल एक  चेहरा ही ऐसा है जो अपनी राजनीतिक जमीन दूसरे राज्यों में तलाश रहा है। उस चेहरे का नाम है के चंद्रशेखर राव। केसीआर तेलंगाना के मुख्यमंत्री है और फ़िलहाल मोदी की राजनीति के खिलाफ तो है लेकिन मौन भी है। पहले चले थे एक नए गठबंधन की तलाश में। कई नेताओं से मिले भी। कई राज्यों का दौरा भी किया लेकिन बात नहीं बनी। इनका तर्क था कि गैर कोंग्रेसी और गैर बीजेपी वाला मोर्चा तैयार हो। लेकिन बात नहीं बनी। इसी बीच केसीआर की बेटी का मामला दिल्ली शराब घोटाला तक पहुंचा और फिर वह जांच के घेरे में आ गई। बेटी जैसे ही जांच के घेरे में आई केसीआर भी जांच के घेरे में आये। मोदी सरकार की एजेंसियां उनतक पहुँचती वे मौन हो गए। अभी मौन ही है। 
       अब खेल देखिये। तेलंगाना में केसीआर की सरकार है। उनकी पार्टी बीआरएस वहां सत्ता में है और उसकी मजबूत पकड़ भी है। लेकिन इस बार केसीआर की चुनौती बढ़ी  हुई है। एक तरफ कांग्रेस का लगातार हमला है तो दूसरी तरफ से बीजेपी की घेराबंदी। कह सकते हैं कि केसीआर इस बार मुश्किल में हैं। वे चाहते हैं कि कोई रास्ता निकले नहीं कुछ दिख नहीं रहा है। उधर कांग्रेस ने साफा कह दिया है कि तेलंगाना में वह केसीआर के खिलाफ मैदान में अकेले उतरेगी। मामला नाजुक हो चला है। लेकिन चुनाव में क्या होगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है।  
   इधर केसीआर लगातार महाराष्ट्र का दौरा कर रहे हैं और किसानो का मुद्दा उठा रहे हैं। या वाजिब मुद्दा भी है। कहने को महाराष्ट्र में शिंदे सरकार तो चलती दिख रही है लेकिन सच ये है कि वहां किसानों की जो दशा है उस पर शिंदे सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। ऐसे में केसीआर को लग रहा है कि आगामी चुनाव में किसानो का संगठन अगर उसके साथ आता है तो उसकी जमीन तैयार हो सकती है और बीआरएस को कुछ सीटें हतः लग सकती है। ऐसा होता है तो बीआरएस धीरे -धीरे राष्ट्रीय पार्टी बनने के दौर में शामिल होगी।  
    महाराष्ट्र के लोग भी कह रहे हैं कि बहुत ही कम समय में बीआरएस ने यहाँ अपने संगठन को खड़ा कर लिया है। खुद केसीआर ही कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में उनके 14 लाख से ज्यादा अधिकारी तैयार हैं। जानकार मान रहे हैं कि अगर वाकई में ऐसा है तो अगले चुनाव में केसीआर भी एक फैक्टर हो सकते हैं। खबर के मुताबिक किसानो का बड़ा जत्था केसीआर के साथ जुड़ रहे हैं और होने साफ़ कर दिया है कि उनकी सरकार आती है तो किसानो की सरकार होगी। सारे निर्णय किसानो के जरिये ही लिए जायेंगे।        
लेकिन केसीआर की परेशानी तेलंगाना में बढ़ती जा रही है। वहां कांग्रेस हमलावर है और कांग्रेस का हर हमला बीआरएस को भारी पड़ता जा रहा है। जाहिर है कि तेलंगाना में बीआरएस और कांग्रेस की लड़ाई होती है तो बीजेपी इसका लाभ उठा सकती है। बीजेपी को अभी तक इसी तरह की राजनीति रास आती है। दो के झगडे में वह अपना लाभ लेकर नकल जाती है। केसीआर की यही बड़ी चिंता है। और यही वजह है कि वे लगातार कांग्रेस पर भी हमला कर रही है और बीजेपी पर भी।    
 केसीआर इन दोनों महाराष्ट्र की यात्रा पर आये थे। कोल्हापुर में पत्रकारों के सामने आये। उन्होंने कई बड़ी बात कही। कुछ दावे भी किये। केसीआर ने कहा कि शरद पवार हमें बीजेपी की बी टीम कहते थे। लेकिन आज आप उनकी पार्टी की हालत जानते हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना टूटी, एनसीपी टूटी, अब कांग्रेस भी टूटने की कगार पर है।                केसीआर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार किसानों की आत्महत्या के प्रति उदासीन है। हमने महाराष्ट्र में भी तेलंगाना पैटर्न लागू करने के बारे में कहा था लेकिन इस सरकार को किसानों की आत्महत्या से कुछ लेना देना नहीं है। महाराष्ट्र में ही एक अधिकारी ने बताया कि तकरीबन एक लाख किसान परेशान होकर आत्महत्या के मूड में हैं, लेकिन सरकार इस बात को नजरअंदाज कर रही है।
              एनडीए या ‘इंडिया’ में क्यों नहीं गए? इस पर चन्द्रशेखर राव ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हम तीसरे मोर्चे के रूप में काम नहीं करना चाहते। हम न तो इंडिया के पक्ष में हैं और न ही एनडीए के पक्ष में हैं। लेकिन हमने लोगों को एक नया विकल्प प्रदान किया है। कांग्रेस 50 साल और बीजेपी 10 साल तक सत्ता में रही लेकिन आज भी लोग निराश हैं। हमारी कार्य पद्धति को देखकर कई पार्टियों ने हमसे संपर्क किया है। 

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