डायबिटीज के मरीज अक्सर अपने पसंदीदा फलों से दूरी बना लेते हैं, खासकर आम से। वजह साफ है कि शुगर बढ़ने का डर।लेकिन क्या सच में आम पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? या फिर सही तरीके से खाया जाए तो इसका आनंद लिया जा सकता है? यही सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जिसे डायबिटीज है और आम बेहद पसंद है।चलिए आपको इस सवाल का जवाब देते हैं
इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल एक्सपर्ट Luke Coutinho ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि आम से डरने की जरूरत नहीं, बल्कि समझदारी से खाने की जरूरत है। अगर आपकी शुगर कंट्रोल में नहीं है, या आप जरूरत से ज्यादा आम खा रहे हैं, खासकर रात में, तो यह नुकसानदायक हो सकता है।लेकिन अगर आप संतुलन बनाए रखें, तो आम को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है।
आम में नेचुरल शर्करा जरूर अधिक होती है, लेकिन इसमें कई पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। खास बात यह है कि इसमें मैंगिफेरिन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जिसे एंटी-डायबिटिक गुणों के लिए जाना जाता है। यानी सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा भी दे सकता है।
Luke Coutinho सलाह देते हैं कि आम को अकेले खाने के बजाय इसे संतुलित तरीके से लिया जाए।जैसे आप इसे मेवे, बीज या दही के साथ खा सकते हैं।इससे शरीर में शुगर का लेवल अचानक बढ़ने से बचता है और ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होता है। यही तरीका आम खाने को ज्यादा सुरक्षित बनाता है।
सबसे जरूरी बात है मात्रा और समय का ध्यान रखना। एक बार में बहुत ज्यादा आम खाना सही नहीं है। अगर आपका शरीर सहन करता है तो एक छोटा हिस्सा खाया जा सकता है, और अगर शुगर बढ़ती महसूस हो तो मात्रा और कम करनी चाहिए।देर रात आम खाना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि उस समय शरीर की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है।
यह भी समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने शरीर को समझें और उसी के अनुसार फैसला लें।अगर आम खाने के बाद शुगर लेवल बढ़ता है, तो उसे सीमित करना ही बेहतर होगा।डायबिटीज में आम पूरी तरह वर्जित नहीं है, लेकिन लापरवाही बिल्कुल नहीं चलती। सही मात्रा, सही समय और सही तरीके के साथ आप इस फल का आनंद ले सकते हैं।

