साल में दो बार होंगे बोर्ड एग्जाम,पर दोनों देना जरूरी नहीं:शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

0
358

बीरेंद्र कुमार झा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएगी,लेकिन इन परीक्षाओं में साल में दोनो बार शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक बार अवसर मिलने के डर से होने वाले तनाव को हटाने के लिए यह विकल्प पेश किया जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हमारी कोशिश है कि 2024 से साल में दो बार परीक्षाएं आयोजित की जाए।

धर्मेंद्र प्रधान ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि विद्यार्थियों के पास इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तरह ही साल में दो बार 10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने का विकल्प होगा।वह अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर चुन सकते हैं ,लेकिन यह वैकल्पिक होगा, कोई बाध्यता नहीं होगी।

अंकों से संतुष्ट नहीं है तो दें अगली परीक्षा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी अक्सर यह सोचकर तनावग्रस्त हो जाते हैं कि उनका एक साल बर्बाद हो गया, उन्होंने मौका गंवा दिया, या वह बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे ।उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी परीक्षा के पहले सेट में प्राप्त अंकों से संतुष्ट है, तो वे अगली परीक्षा में शामिल न होने का विकल्प चुन सकते हैं।संतुष्ट न होने की स्थिति में वे उसी वर्ष आयोजित होने वाली अगली परीक्षा में बैठ सकते है। दोनों परीक्षाओं में जो उनके लिए बेहतर होगा वे उसका लाभ उठा सकते हैं।इसमें हर कुछ वैकल्पिक होगा, कुछ भी अनिवार्य नहीं होगा।

अगस्त में हुई थी एनसीएफ की घोषणा

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा अगस्त में घोषित नई पाठ्यक्रमों की रूपरेखा (NCF)के अनुसार बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित होगी। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि साल में दो बार बोर्ड की परीक्षा आयोजित करने की योजना पर उन्हें विद्यार्थियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

विदेशी विश्वविद्यालय के परिसर स्थापित करने पर लेकर सरकार के विचार के बाबत शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि दो आईआईटी दिल्ली और मद्रास अपने विदेशी परिसरों की स्थापना के अग्रिम चरण में है और कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है। प्रधान ने कहा कि विदेश मंत्रालय इसका समन्वय कर रहा है।

डमी स्कूलों पर गंभीर चर्चा की जरूरत

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब समय आ गया है की डमी स्कूलों के मुद्दे पर गंभीर चर्चा की जाए।उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि विद्यार्थियों को कोचिंग की आवश्यकता ना पड़े। एन नीट और जी की तैयारी करने वाले कई उम्मीदवार अपने गृह राज्यों के स्कूलों में दाखिला लेते हैं और कोचिंग कक्षाओं के लिए कोटा चले जाते हैं।डमी स्कूलों के मुद्दे को कई विशेषज्ञों ने उठाया है। उनका मानना है कि स्कूल न जाने से छात्रों के व्यक्तित्व का विकास बाधित होता है और वे तनावग्रस्त हो जाते हैं।

5000 कौशल केंद्र स्थापित करने की योजना

धीरेंद्र प्रधान के मुताबिक शिक्षा और कौशल विकास मंत्रालय 21वीं सदी के कार्य स्थल क्षेत्र में आगे बढ़ाने के वास्ते नई पीढ़ी को तैयार करने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं कौशल विकास मंत्री ने कहा आज लगभग 1000 कौशल केंद्र है इसमें एक लाख उम्मीदवार नामांकित है आगे हमारी योजना 5000 ऐसे केंद्र स्थापित करने की है राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू नहीं करने के कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के फैसले के बारे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा इन राज्यों की आपत्तियों अकादमी की नहीं बल्कि राजनीतिक हैं।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here