- बीरेंद्र कुमार झा
2024 ईस्वी में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से ही बिहार में इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जेडीयू,आरजेडी,और कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों वाले सत्ताधारी महागठबंधन के परंपरागत वोटरों में सेंधमारी के लिए बीजेपी ‘ ZY ‘ का घेरा तैयार कर रही है।चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘ ZY ‘ के घेरे के सहारे दलित पिछड़े और अति पिछड़े की गोलबंदी करनी शुरू कर दी है। दलित, पिछड़े और अतिपिछड़े को महागठबंधन का परंपरागत वोटर माना जाता है। बीजेपी को यह पता है कि अगर बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करनी है तो दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वोटरों को अपने साथ जोड़ना होगा। इसको लेकर पार्टी बिहार में जोड़ने और तोड़ने के अभियान में जुट गई है। ऐसा माना जाता है कि लोकसभा चुनाव के करीब आते-आते बिहार में कई बड़े चेहरे दल बदल कर इधर से उधर हो सकते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रख रहे है बिहार पर पैनी नजर
बीजेपी के साथ गंठबंधन की सरकार चला रहे नीतीश कुमार जबसे बीजेपी से नाता तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस वाले महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार में सरकार चलाने लगे हैं,तभी से पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार को लेकर काफी सक्रिय हो गए हैं। पिछले चार-पांच महीने में अमित शाह ने बिहार में कई दौरे कर सभाओं को संबोधित किया। इन सभाओं में अमित शाह नीतीश कुमार के साथ साथ लालू प्रसाद यादव पर भी जमकर बरसे। अमित शाह को यह अच्छी तरह से पता है कि बिहार के चुनाव में जाति समीकरण एक प्रमुख भूमिका निभाता है। बिहार में जीत हासिल करने के लिए यहां की जाति समीकरण को साधना बहुत जरूरी होता है।अमित शाह और उसकी टीम ने बिहार में लोकसभा का चुनाव जीतने के लिए पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है । पार्टी सूत्रों की माने तो बीजेपी ने यह तय कर लिया है कि किस नेता को बीजेपी से जोड़ना है और किसे हटाना है, ताकि बिहार के पिछड़े,दलित और अति पिछड़े समुदाय को बीजेपी के पक्ष में लाकर 2024 के लोक सभा चुनाव में बीजेपी के जीत का मार्ग प्रशस्त जा सके।
ZY के सहारे दलित ,पिछड़े और अति पिछड़े की साधने की तैयारी
लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बीजेपी ने जो ग्रुप तैयार किया है उसमें पार्टी ने यह तय कर लिया है कि उसे कब किसे जोड़ना है और किसे तोड़ना है। इस क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे पहले चिराग पासवान को साधा है। भारतीय जनता पार्टी ने अब चिराग पासवान को जेड कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान कर दी है। रामविलास पासवान के बाद बिहार में चिराग पासवान ही दलितों के बड़े नेता हैं। रामविलास पासवान का बेटा होने के कारण भी उनके समाज के लोग उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने चिराग पासवान का वोट बैंक देखा है।साथ ही बीजेपी ने यह भी देखा था कि किस प्रकार 2020के विधान सभा चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की पार्टी को क्षति पहुंचाई थी।वैसे भी चिराग पासवान अपने आप को 2019 के लोक सभा चुनाव के समय से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान कहते रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने नीतीश कुमार का साथ छूटने के बाद चिराग पासवान को जेड कैटेगरी की सुरक्षा देकर इस बात का संकेत दे दिया है कि जल्दी ही चिराग पासवान प्रत्यक्ष तौर से बीजेपी के साथ जुड़ेंगे।
इसी प्रकार बीजेपी ने मुकेश साहनी यानी सन ऑफ मल्लाह को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी है। मुकेश साहनी इससे पहले भी बीजेपी के साथ रह चुके हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव के समय बीजेपी और वीआईपी पार्टी में अनबन होने पर दोनों ने एक दूसरे का साथ छोड़ दिया था। बीजेपी ने मुकेश साहनी के विधायकों को तोड़कर अपने साथ मिला लिया था। लेकिन उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा देकर बीजेपी ने एक बार फिर से उन्हें अपने साथ मिलाने का प्रयास किया है। बीजेपी, वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी को फिर से बीजेपी से जोड़कर बिहार के पिछड़ी और अति पिछड़ी वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।
पिछड़ों और अति पिछड़ों को बीजेपी से जोड़ने के प्रयास के अंतर्गत बीजेपी हाल में जेडीयू से निकलकर अलग राष्ट्रीय लोक जनता दल पार्टी का निर्माण करने वाले उपेंद्र कुशवाहा पर भी नजर बनाए हुए है । इस बात की चर्चा है कि बीजेपी जल्दी ही उपेंद्र कुशवाहा को भी वाई जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करेगी, ताकि बीजेपी उपेंद्र कुशवाहा के जरिए उनके प्रभाव में आने वाले कोइरी और कुर्मी वोट बैंक को साध कर बीजेपी के पक्ष में कर सके।

