अखिलेश अखिल
अभी हल में ही पीएम मोदी ने एक सभा को सम्बोधित करते हुए विपक्षी दलों पर हमला किया और उनके भ्रष्टाचार की कलई खोली थी। पीएम मोदी की सूची में ऐसा कोई दल नहीं नहीं था जिनके नेताओं की कहानी और उनके भ्रष्टाचार पर पीएम मोदी ने नहीं कहा हो। मोदी लालू की कहानी भी कहे और शरद पवार परिवार की कथा को बह आगे बढ़ाये। अखिलेश यादव से लेकर विपक्ष के सारे नेताओं के भ्रष्ट आचरण का उन्होंने खुलासा किया था। ममता दीदी भी उस सूची में शामिल थी और हेमंत सोरेन भी। पीएम की उस सूची में केसीआर भी थे स्टालिन भी। सूची जारी करने के बाद उन्होंने अपने साइन को पीटते हुए कहा कि ये विपक्षी दल भ्रष्टाचार की गारंटी है। ये जहाँ भी जायेंगे वही करेंगे जो करते आये हैं। इसके बाद वे फिर से सीना ठोकते हुए कहा ” हम भी आपको एक गारंटी देते हैं कि इन सारे भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसेंगे। भीड़ से तालिया बजती रही। पीएम मोदी मुदित होते रहे। उस रोज सभा में फिर से मोदी के खूब जयकारे लगे थे।
उसके कुछ ही दिन बाद महाराष्ट्र में खेला हुआ। एनसीपी टूट गई और एनसीपी के लगभग सभी कथित भ्रष्टाचारी शिंदे सरकार में शामिल हो गए। शरद पवार के भतीजे अजित पवार की अगुवाई में एनसीपी को तोडा गया था। अजित पवार समेत 9 लोगों ने झट से मंत्रिमंडल में शामिल भी हो गए। एनसीपी के जो लोग शिंदे मंत्रिमंडल में शामिल हुए उनमे से अजित पवार समेत 6 लोगों पर मोदी सरकार की जांच एजेंसियां लगी हुई थी। जांच चल रही थी। इस घटना के बाद पीएम मोदी शांत हो गए। कल तक जो अजित पवार जान के दायरे में थे अचानक बीजेपी के साथ मिलकर उपमुख्यमंत्री बन गए। पिछले महीने सीबीआई और ईडी की कार्रवाई के खिलाफ 14 दलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया तो खुद प्रधानमंत्री मोदी इसके बचाव में उतर आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त नेता एक साथ एक मंच पर आ रहे हैं। कुछ दलों ने भ्रष्टाचारी बचाओ आंदोलन छेड़ा हुआ है, लेकिन एक्शन नहीं रुकेगा। कोई पीएम मोदी से पूछ सकता है कि क्या शिंदे गुट के खिलाफ उन्होंने कोई जांच कराई। शिंदे गट के कई विधायकों की जांच चल रही थी। सरकार के साथ आते ही उनकी जांच भी ख़त्म हो गई ?
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद विपक्ष ने भी इस बार जोरदार पलटवार कर दिया। कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष ममता बनर्जी ने मंच पर वाशिंग मशीन लगाकर बीजेपी पर तंज कसा। ममता ने कहा कि बीजेपी वाशिंग मशीन है और दागियों को धुलकर सफेद कर देती है। ममता ने इसका लाइव डेमो भी दिखाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। खड़गे ने कहा कि विपक्ष के 95 फीसदी नेताओं पर ईडी और सीबीआई का केस दर्ज हुआ है, लेकिन जो नेता बीजेपी में शामिल हो जाते हैं उसका दाग धुल कर साफ कर दिया जाता है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे कहते हैं कि बीजेपी में आकर भ्रष्टाचार करो। हालिया अजित पवार की घटना केजरीवाल के बयान को दुरुस्त करती है। अजित पवार तो लम्बे समय से ईडी के निशाने पर थे। उनका पूरा परिवार इसको लेकर परेशान था। लेकिन अब वही अजित पवार चहक रहे हैं। वे पीएम मोदी की सराहना भी कर रहे हैं और कह रहे हैं उनके जैसा नेता देश को मिला ही नहीं था।
खैर ,कांग्रेस, डीएमके, जेडीयू, राजद, तृणमूल कांग्रेस समेत 14 पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और ईडी एक्शन के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों को सेलेक्टिव टारगेट करने के लिए भेजा जाता है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी के मुताबिक ईडी पीएमएलए एक्ट के तहत 2021-22 में 1180 केस दर्ज की है। 2019-20 में यह 981 था। सिंघवी ने कहा कि इस एक्ट के तहत अब तक सिर्फ 23 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आवाज दबाने के लिए जांच एजेंसियों का उपयोग किया जाता है। याचिका में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर ढील देने की मांग की गई है और कहा गया है कि इसके जरिए सिर्फ विपक्षी नेताओं को टारगेट किया जा रहा है।
खैर इन सभी बातो को छोड़ भी दिया जाए तो इस सूचि पर गुजर करने की जरूरत है। यह सूंची उन लोगों की है जो कल तक विपक्ष में रहते हुए बीजेपी पर हमला करते थे। बीजेपी इनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे और कई बार इनके यहाँ जांच एजेंसिया दबिश दे चुकी थी। जब तक ये नेता विपक्ष में थे तब तक मोदी सरकार के निशाने पर थे और जैसे ही इन नेताओं ने बीजेपी का हाथ थामा इनके सारे भ्रष्टाचार ख़त्म हो गए। न पीएम मोदी कुछ बोलते हैं और न ही अमित शाह। उलटे ये सभी नेता इनके बड़े नेताओं में शामिल है।
हिमंत बिस्वा सरमा को कौन नहीं जनता। कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रहे हिमंत बिस्वा शर्मा पर शारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने आरोपी बनाया था। सरमा पर आरोप था कि शारदा ग्रुप के डायरेक्टर सुदीप्त सेन से 20 लाख रुपए हर महीने लिए, जिससे ग्रुप का कामकाज बेहतर तरीके से चल सके। सरमा से अंतिम बार सीबीआई ने 27 नवंबर 2014 को पूछताछ की थी। हेमंत ने अगस्त 2015 में बीजेपी ज्वाइन कर लिया। कांग्रेस का आरोप है कि इसके बाद सीबीआई ने हिमंत की फाइल बंद कर दी। हिमंत अभी असम के मुख्यमंत्री हैं।
शुभेंदु अधिकारी कभी ममता सरकार में कद्दावर मंत्री थे। शुभेंदु अधिकारी से सीबीआई ने शारदा घोटाले में पूछताछ शुरू की थी। उन पर आरोप था कि शारदा ग्रुप के डायरेक्टर सुदीप्त सेन से फेवर लिया था। शुभेंदु पर बाद में नारदा स्टिंग ऑपरेशन में भी पैसा लेने का आरोप लगा, जिसकी जांच ईडी ने शुरू की। लेकिन जैसे ही अधिकारी बप में गए जांच बंद हो गई और जाँच एजेंसियां चुप हो गई। आज अधिकारी बीजेपी के बड़े नेता है और बंगाल में प्रतिपक्ष के बड़े चेहरे हैं।
इसी तरह जितेंद्र तिवारी बह पश्चिम बंगाल-के आसनसोल से टीएमसी के बड़े नेता थे। फिर एक दिन तिवारी बीजेपी में शामिल हो गए। उस वक्त मोदी सरकार में मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो ने इसका खुलकर विरोध किया था। सुप्रियो ने कहा था कि कोयला चोर और तस्करों को पार्टी में लाने का नुकसान होगा। सुप्रियो ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर कहा था कि कोल तस्करी केस में सीबीआई की कार्रवाई के बाद कुछ नेता बीजेपी में आने की जुगत लगा रहे हैं। मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।तिवारी आज बीजेपी के बड़े नेता हैं।
महाराष्ट्र- शिवसेना उद्धव गुट का आरोप है कि नारायण राणे को भी बीजेपी ने वाशिंग मशीन में डालकर पाक-साफ कर दिया है। राणे अभी मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने उन पर आदर्श सोसायटी मामले में हेरफेर का आरोप लगाया था। साल 2012 में सोमैया ने सीबीआई को 1300 पन्नों का एक दस्तावेज भी सौंपा था। साल 2017 में किरीट सोमैया ने ईडी को पत्र लिखकर नारायण राणे की संपत्ति जांच करने की मांग की थी। सोमैया ने कहा था कि राणे मनी लॉन्ड्रिंग कर अपना पैसा सफेद कर रहे हैं। साल 2019 में नारायण राणे बीजेपी में शामिल हो गए और उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया।
कर्नाटक में बीजेपी का चेहरा बीएस येदियुरप्पा पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। येदियुरप्पा को इसकी वजह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। येदियुरप्पा पर 2011 में 40 करोड़ रुपए लेकर अवैध खनन को शह देने का आरोप लगा था और लोकायुक्त ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। 2013 के चुनाव में येदियुरप्पा अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़े, जिससे बीजेपी को नुकसान का सामना करना पड़ा। इसके बाद येदि की घर वापसी हुई। 2016 में सीबीआई की विशेष अदालत ने येदियुरप्पा को क्लीन चिट दे दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी में आने के बाद येदियुरप्पा के खिलाफ एजेंसी ने जांच ठीक ढंग से नहीं किया।
2009 से 2014 तक मनसे के विधायक रहे प्रवीण डारेकर पर 2015 में मुंबई कॉपरेटिव बैंक में 200 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया गया था। बीजेपी ने इस मामले को जोरशोर से उठाया, जिसके बाद आर्थिक अपराध शाखा को केस की जांच सौंपी गई। 2016 में डारेकर बीजेपी में शामिल हो गए और विधान परिषद पहुंच गए। साल 2022 में आर्थिक अपराध शाखा ने उन्हें क्लीन चिट दे दिया। डारेकर अभी मुंबई कॉपरेटिव बैंक सोसाइटी के अध्यक्ष हैं।
पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल पर बीजेपी सरकार के दौरान राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था। हार्दिक को इसकी वजह से तड़ीपार भी रहना पड़ा था। हार्दिक पर 20 केस दर्ज किए गए थे। पटेल गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए , कांग्रेस का आरोप है कि राजद्रोह केस में बचने के लिए हार्दिक ने यह कदम उठाया। हार्दिक अभी बीजेपी के वीरमगाम से विधायक हैं।
विपक्ष का कहना है कि इन नामों के अलावा सोवन चटर्जी, यामिनी जाधव और भावना गवली जैसे नेताओं पर भी जांच एजेंसी ने कोई एक्शन नहीं लिया, क्योंकि सभी बीजेपी या उनके सहयोगी पार्टी में चले गए।
महाराष्ट्र के कद्दावर नेता अजित पवार पर 70 हजार करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले का आरोप 2014 से पहले बीजेपी लगाती थी। इस मामले की जांच ईओडब्लयू को सौंपी गई थी। अजित पवार को लेकर बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे पवार को जेल में चक्की पीसने की बात कह रहे थे। आज पवार फिर से बीजेपी के साथ है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय पर 2015 में शारदा घोटाले में पैसा लेकर चिटफंड कंपनी फेवर देने का आरोप लगा था। रॉय ने 2017 में बीजेपी ज्वाइन कर लिया, जिसके बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
