राहुल को पप्पू बताने वाली बीजेपी अब पप्पू के मोहब्बत की दुकान वाले नारे से हो रही आहत !

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अखिलेश अखिल 

समय तो सबका बदलता है। बदलाव ही प्रकृति का नियम है और यह शाश्वत भी है। न कोई बड़ा होता है और कोई छोटा। जब समय किसी के अनुकूल चलता है तब उसकी जयकार होती है और जब समय आपके खिलाफ जाता है तो अपने भी पराये होते जाते हैं। बीजेपी का भी समय बदला। उसने भी लम्बा समय संघर्ष में बिताया। कभी सांसदों की पार्टी कहलाती थी लेकिन समय बदला तो सत्ता पर काबिज भी हुई। 303 सीटों तक जितने में सफल हुई। पार्टी का इतना विस्तार हुआ कि दुनिया की सबसे बड़ी पारी कहलाने लगी। जो कल तक बीजेपी को गरियाते थे ,वे भी बीजेपी का भजन करने लगे। जिस मीडिया में बीजेपी और संघ के खिलाफ हमेशा खिलाफत की खबरे लिखी जाती थी ,वही मीडिया बीजेपी के सामने चरण बंदना करने लगी। गोदी मीडिया तक कहलाने लगी। लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ खुद को इतना गिरा लेगा कोई जनता तक नहीं था। दुनिया देश की  पत्रकारिता पर चाहे जो भी राय रखती हो लेकिन देश की मीडिया के बारे में जब देश के लोग ही जुदा राय रखने लगे तो कहने को कुछ बच नहीं जाता ! अगर यह आजादी का अमृतकाल है तो पत्रकारिता का विषकाल भी। आने वाली पीढ़ियां जरूर हमसे इसका हिसाब लेगी लेकिन तब हम जवाब देने के लिए रहेंगे नहीं।      
  तो कहानी ये है कि जिस बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को पप्पू बताया अब वही पप्पू बीजेपी को आहत कर रहे हैं। पप्पू पढ़े लिखे निकले। मीडिया को साथ लेकर बीजेपी ने करोडो रुपये राहुल को बदनाम करने पाए खर्च किया था। राहुल बदनाम भी हुए। जब हार होती है तो बदनामी भी बढ़ती जाती है। लेकिन समय ने पाला बदला तो वही पप्पू अब बीजेपी को सत्ता रहा है। उसके मुहब्बत की दूकान की कहानी बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। नारे लग रहे हैं। देश की बात कौन करे विदेशो में भी डंके बज रहे हैं। यह सब समय का खेल है। बीजेपी ने कभी नहीं सोंचा था कि पप्पू ही उसके लिए खतरा पैदा करेंगे। लेकिन बीजेपी के सामने खतरे ही खतरे हैं। लोभी भगत जन  माने या नहीं माने लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेता कफ गंभीर हो गए हैं। उनकी हर चाल अब फेल हो रही है। जो खेल बीजेपी करती रही है अब वही खेल कांग्रेस करती जा रही है। बीजेपी इल्जाम तो अब लगा नहीं सकती। पप्पू अब बीजेपी की हर चाल को समझ गए हैं और कह सकते हैं कि वह अकेले बीजेपी पर भारी पड़ रहे हैं। कर्नाटक में जो कुछ भी हुआ उसमे पप्पू की बड़ी भूमिका थी। उसके मोहब्बत की दूकान की बड़ी भूमिका थी। आगे जो भी होगा उसमे मोहब्बत की दूकान की भूमिका ही होनी है। अब जातीय भेदभाव से दूर होकर सभी इस नारे को जाप रहे हैं। दलित और मुसलमान कुछ ज्यादा ही इस नारे को जाप रहे हैं। खेल जो बदल चूका है। समय जो बदल गया है।          
  राहुल गांधी के इस नारे का सकारात्मक असर दिखना शुरू हो गया है। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान मुसलमान मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए राहुल गाँधी द्वारा चला गया यह दांव कांग्रेस के लिए काफी कारगर साबित हुआ। कर्नाटक में पार्टी को जबरदस्त जीत मिली और इस जीत के पीछे मुसलमान और दलित ,पिछड़े समुदाय के द्वारा उसे किया गया समर्थन बड़ा कारण बना।कर्नाटक के मुस्लिमों और दलितों ने कांग्रेस पार्टी को भर-भर के वोट दिया। तमाम कोशिशों के बाद भी बीजेपी को इस राज्य के सिर्फ 2% मुस्लिम मतदाताओं ने वोट किया। जेडीएस का एक भी दांव यहां के मुस्लिमों को नहीं रिझा सका। कांग्रेस अब इसी दांव को अगले लोकसभा चुनाव में भी आजमाना चाहती है। यही कारण है कि विपक्षी एकता की मुहिम में जुटे नेताओं के बीच राहुल गांधी एक बार फिर मोहब्बत की दुकान लगाने निकल पड़े हैं।     
  बता दें कि, मोहब्बत की दुकान का नारा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सबसे पहले सुनाई पड़ा था। माना गया था कि इसके जरिए कांग्रेस देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय को साधने की रणनीति बना रही थी, जो कभी उसका सबसे बड़ा वोट बैंक हुआ करता था। इस समुदाय के वोट पर कांग्रेस का एकक्षत्र राज हुआ करता था। लेकिन बाद में पार्टी में हुई कई टूट और अनेक क्षेत्रीय दलों के उभार के बाद यह वर्ग अलग-अलग दलों में बंटता चला गया, इसी कारण कांग्रेस पार्टी की दुर्दशा हो रही थी। लेकिन दुबारा खड़ी होने की पुरजोर कोशिश में जुटी कांग्रेस अब पूरी मेहनत के साथ इस वोट बैंक को दुबारा अपने पाले में लाने का प्रयास कर रही है।
            माना जाता है की 2014 में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने उससे सबक नहीं लिया जिस वजह से अगले लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को हार मिली। पार्टी में कई स्तरों पर बदलाव की जरुरत थी। संगठन में भी बदलाव की जरुरत थी। लेकिन बहुत समय के बाद हाल के दिनों में कई ऐसे बदलाव हुए हैं जिसके कारण कांग्रेस एक बार फिर मजबूत होती दिखाई पड़ रही है।वहीं भाजपा को कई अलग-अलग मोर्चों पर जनता को जवाब देना पड़ रहा है, जो आसान नहीं है।
          महंगाई, बेरोजगारी, 9 साल की एंटी इनकमबेंसी, बदहाल किसान, महिला खिलाड़ियों के सम्मान सहित कई ऐसे मुद्दे हैं जो भाजपा को काफी परेशान कर रहे हैं और ये लोकसभा चुनाव को भी प्रभावित कर सकते हैं। 2023 के अंत से लेकर 2024 के अप्रैल तक चुनाव की कैसी परिस्थितियां बनती हैं, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस समय जो हाल है, उससे मोदी सरकार परेशान होती दिखाई पड़ रही है।
        2014 में 44 तो 2019 में उसे 52 सीटों पर सफलता मिली, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण बात है कि 2019 में भाजपा को जिन 303 सीटों पर सफलता मिली थी, उनमें 190 लोकसभा सीटों पर उसकी लड़ाई कांग्रेस से थी। 185 सीटों पर उसे अन्य क्षेत्रीय दलों का सामना करना पड़ा था, जिसमें उसने 128 सीटों पर सफलता हासिल की थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार मोटा-मोटी 200 लोकसभा सीटों पर भाजपा और कांग्रेस में आमने-सामने की लड़ाई है। कई सीटों पर कांग्रेस ने विपक्षी दलों का खेल ख़राब किया था। अब यदि कांग्रेस अपनी लोक-लुभावन योजनाओं और सामाजिक समीकरणों के सहारे लगभग 200 सीटों पर भाजपा को घेरने में कामयाब रहती है तो भाजपा के लिए सत्ता की राह कठिन हो सकती है।
     कई विपक्षी पार्टियों का भी यही मानना है की कांग्रेस को अगले लोकसभा चुनाव में सिर्फ उन्हीं सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारना चाहिए जहां बीजेपी से उनकी सीधी लड़ाई है, बाकि सीटों पर उन्हें अन्य विपक्षी दलों का समर्थन करना चाहिए, ताकि बीजेपी को रोका जा सके।
            बदलती परिस्थितियों से भाजपा भी वाकिफ हो रही है। भाजपा की थिंक-टैंक राहुल के इस चाल की काट तलाशने में जुट चुके हैं। यही कारण है कि राहुल गांधी की इस मुहिम को ध्वस्त करने के लिए उसने अपने प्रखर नेताओं की फौज उतार दी।
             केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर, गिरिराज सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी सहित अनेक नेता राहुल गांधी के हर बयान में कमियां निकालने में जुट गए हैं। रवि शंकर प्रसाद ने तो यहां तक आरोप लगा दिया की राहुल गांधी मोहब्बत की दुकान के नाम पर हर जगह नफरत फैला रहे हैं। यही  बयान कांग्रेस की जीत है। यही नारे बीजेपी को परेशान किये हुए है। कहा जा रहा है कि ग्लोबल दुनिया में फिर देश और विदेश में भेद कहाँ रह गया है ? समय बड़ा बलवान है। संभव है कि अगले चुनाव में भले ही बीजेपी जीत भी जाए लेकिन अब वह कांग्रेस विहीन का नारा तो नहीं लगा सकती। 

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