जल्दी ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी केमुख्यमंत्री का होगा शपथ ग्रहण

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चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश मैं चुनाव के बाद चुनाव परिणाम भी आ गये। दक्षिण भारत के केरलम में वाम दल के नेतृत्व वाली एलडीएफ की जगह कांग्रेस की अगुवाई वाली यूडीएफ के सत्तासीन होने वाली है तो दक्षिण के ही दूसरे राज्य तमिलनाडु में गठबंधन के मुख्यमंत्री के तौर पर फिल्म अभिनेता से राजनेता बने विजय थलपति के विराजमान होने वाले हैं तो असम में हिमंत विश्व शरमा लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने वाले हैं।पुडुचेरी में एनडीए के मुख्यमंत्री के तौर पर एन रंगास्वामी पांचवीं बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते नजर आ रहे हैं। इस सब को लोग सरसरी निगाहों से देख रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां मुख्यमंत्री की कुर्सी कौन संभाल लेंगे, इस पर लोगों की विशेष निगाहें हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के चयन पर लोगों की विशेष निगाह इसलिए नहीं है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी कि टीएमसी को पराजित करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को चुनाव आयोग के द्वारा बड़े पैमाने पर केंद्रीय रक्षावलों को नियुक्त करवाना पड़ा था। यह बात मैं नहीं ममता बनर्जी कर रही हैं और फिर केंद्रीय बलों की पश्चिम बंगाल के चुनाव में नियुक्ति को तो पश्चिम बंगाल के लोगों ने प्रत्यक्ष और अन्य जगह के लोगों ने समाचार माध्यमों से देखा। ममता बनर्जी अपनी और अपनी पार्टी टीएमसी की हार को वास्तविक नहीं बल्कि बीजेपी के नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा 100 सीटों पर जबरन कब्जा कर लेना बताती हैं। लेकिन बीजेपी को इसकी परवाह नहीं और न हीं उन्हें यह डर समा रहा है कि जिस तरह चुनाव परिणाम मानने के बाद जगह-जगह पर टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच लड़ाई झगड़ा शुरू हो रहा है वह पश्चिम बंगाल को अराजक बना देगा। इसके निदान के लिए तो पश्चिम बंगाल में प्रतिनियुक्त केंद्रीय बल कुडूम महीने तक और अभी पश्चिम बंगाल में रोकने का निर्णय ले ही लिया है। लेकिन कुछ तो ऐसा है जिससे नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी अन्य राज्यों जहां इसने बहुमत प्राप्त किया है, को छोड़कर सबसे पहले पश्चिम बंगाल में ही मुख्यमंत्री का चयन करने में जुट गई है।

दरअसल इसके पीछे पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी के नरेंद्र मोदी और अमित शाह सरीखे प्रमुख नेताओं के द्वारा भय से भय मुक्त बंगाल बनाने क्या किया हुआ वायदा है। पश्चिम बंगाल में यह भय सिंडिकेट का है। कम्युनिस्ट के जमाने से ही पश्चिम बंगाल में सिंडीकेटों का आतंक छाया हुआ है। ममता बनर्जी ने जब सिंगूर के मामले को उछाल कर कम्युनिस्ट की जगह सत्ता पर आई तो इस सिंडिकेट ने भी चोला बदल लिया और टीएमसी के लिए काम करने लगे। ममता बनर्जी के लगातार तीन बार पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव जीत का मुख्यमंत्री बनने के दौरान इस सिंडिकेट की जड़ पश्चिम बंगाल में और जम गई। लोगों के रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम मैं दखलअंदाजी से लेकर बड़े – बडे मामले तक में अपनी टांग घुसेड़कर लोगों से कमीशन लेना और खुद का कमीशन काटकरउसे टीएमसी के छोटे भैया नेता से लेकर बड़े नेताओं तक राशि पहुंचाना इनका काम था। एक तरह से पूरे पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच इन सिंडीकेट वालों का आतंक था। पीएम नरेंद्र मोदी टी बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं की इस वायदे को भरोसा कर ही पंजाब के लोगों ने इस बार टीएमसी का सुफड़ा साफ कर दिया। अब बीजेपी के नरेंद्र मोदी और अमित शास्त्री के टॉप के लीडर को या लगता है की कहीं अगर सिंडिकेट टीएमसी को छोड़कर बीजेपी के ही अंदर प्रवेश कर गया तो फिर उनका वादा झूठा हो जाएगा। और फिर ममता बनर्जी इस मुद्दे को जोर-जोर से उछालना प्रारंभ कर देगी। हालांकि इसके बावजूद ममता बनर्जी आगामी 5 साल तक बीजेपी को पश्चिम बंगाल में अस्थिर नहीं कर सकती हैं लेकिन अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश हिमाचल प्रदेश,गोवा और गुजरात, मणिपुर और उत्तराखंड में होने वाले चुनाव में बीजेपी के द्वारा अपने इस वायदे को पूरा नहीं करने की बात को उछाल कर उसे परेशानी में जरूर डाल सकती है।

ऐसे में बीजेपी पश्चिम बंगाल में ऐसे मुख्यमंत्री को लाने की सोच रही है जो घुसपैठियों पर नियंत्रण और बीजेपी की घोषणा पत्र के अनुसार अन्य वेदों को अमली जामा पहनाने का प्रयास तो कर ही सबसे पहले वह सिंडिकेट की आतंक को खत्म कर दे जिसे प्रधानमंत्री भय से भय मुक्त बंगाल कहा करते हैं।

इस मामले में बीजेपी बड़ा ऊहापोह की स्थिति में है। एक तरफ या बीजेपी के निष्ठावान नेता को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनकर अपनी पहली सरकार के माध्यम से पार्टी के समर्पित कार्य करता हूं कोई संदेश दे सकती है की भाजपा अपने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का कितना ध्यान रखती है, तुम्हारी दूसरी तरफ इसे लगता है कि शायद बीजेपी की समर्पित नेता इस सिंडिकेट के संपर्क में नहीं रहने से इस पर नियंत्रण करने में असफल हो सकते हैं ऐसे में टीएमसी से बीजेपी में आए शिवेंदु अधिकारी जैसे नेता को बंगाल का मुख्यमंत्री बनाएं।

दुविधा की इस स्थिति से उबरने के लिए पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के आने की ण जीत के अगले ही दिन बीजेपी यहां नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के चयन में जुट गयी। इसठंलिए दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ झ़महत्वपूर्ण बैठकें चल रही हैं।इन मुलाकातों में शामिल प्रमुख नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन , बीजेपी संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्य दिल्ली में मुख्यमंत्री के नाम को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहे हैं। बंगाल में बीजेपी की जीत के ‘आर्किटेक्ट’ कहे जा रहे सुनील बंसल के साथ-साथ भवानीपुर से ममता बनर्जी को हराने वाले सुवेंदु अधिकारी को भी चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया गया है।

सूत्रों के अनुसार बीजेपी का मुख्यमंत्री 9 मई को पद और गोपनीयता का शपथ लेगा। इसके लिए बीजेपी अपने निम्न प्रमुख नेताओं पर विचार कर रही है:-
शुभेंदु अधिकारी  Adhik(Suvenduari): मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। वे वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और उन्होंने नंदीग्राम/भवानीपुर में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है।

दिलीप घोष (Dilip Ghosh): पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता। वे भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।

समिक भट्टाचार्य (Samik Bhattacharya): वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष, जो पार्टी के भीतर आम सहमति बनाने वाले और RSS पृष्ठभूमि के कारण एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

अग्नमित्रा पॉल (Agnimitra Paul): आसनसोल दक्षिण से विधायक और एक महिला चेहरा, जिन पर पार्टी विचार कर सकती है।

स्वप्नदास गुप्ता (Swapan Dasgupta): पूर्व राज्यसभा सांसद, जो पार्टी के ‘भद्रलोक’ (बुद्धिजीवी) चेहरे के रूप में भी देखे जा रहे हैं

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