नई दिल्ली: बिलकिस बानो ने 2002 में गुजरात दंगों में गैंगरेप और और हत्या के दोषी 11 लोगों के की रिहाई खिलाफ एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोषियों की समय से पहले रिहाई को लेकर बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। बिलकिस ने सुप्रीम कोर्ट के मई में दिए उस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिसमें दोषियों की रिहाई का फैसला गुजरात सरकार पर छोड़ा था। फिर गुजरात सरकार ने 15 अगस्त को दोषियों को रिहा कर दिया था।
Bilkis Bano approaches Supreme Court challenging release of 11 convicts
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— ANI Digital (@ani_digital) November 30, 2022
सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
मुंबई की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 21 जनवरी 2008 को सभी 11 दोषियों को गैंगरेप और बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को बंबई हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
बिलकिस की वकील शोभा गुप्ता ने रखा सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला
बिलकिस बानो का प्रतिनिधित्व करने वाली अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को रखा। गुप्ता ने तर्क दिया कि संभावना कम है कि न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अगुवाई वाली पीठ मामले की सुनवाई कर पाएगी, क्योंकि वह अब संविधान पीठ की सुनवाई का हिस्सा हैं।
गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानों के साथ हुआ था गैंगरेप
गौरतलब है कि गुजरात में 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया गया था, उस समय वह 21 साल की थीं और वह पांच महीने की गर्भवती थीं। परिवार के मारे गए सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मई में सुनाया था फैसला
इस साल मई में, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि गुजरात सरकार क्षमा अनुरोध पर विचार कर सकती है क्योंकि अपराध गुजरात में हुआ था। इस फैसले के आधार पर, गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को रिहा करने का फैसला किया। हालांकि हाई कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार को क्षमा पर विचार करना चाहिए क्योंकि मामले की सुनवाई गुजरात से स्थानांतरण के बाद वहीं हुई थी।

