बीरेंद्र कुमार झा
बिहार विधान मंडल के मानसून सत्र में पिछले 3 दिनों में घंटे भर भी सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी है। बीजेपी लैंड फॉर जॉब मामले में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का इस्तीफा लेने पर अड़ी हुई है। वही आज बीजेपी के द्वारा पटना के गांधी मैदान से रोजगार और शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करने को लेकर हल्ला बोल विधानसभा मार्च का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पूरे राज्य से बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी और युवा शामिल होने के लिए सुबह से ही पटना पहुंचने लगे हैं ।बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने सरकार को तानाशाह बताते हुए कहा कि बीजेपी इसे हटाने के लिए संकल्पित हैं।
विरोध मार्च को देखते हुए जिला प्रशासन के सख्त इंतजाम
बीजेपी के रोजगार और शिक्षक भर्ती को लेकर विधानसभा मार्च को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा बड़े स्तर पर तैयारी की गई है। विधानसभा के बाहर गेट पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। विरोध मार्च को देखते हुए 6 मजिस्ट्रेट 3 डीएसपी,2 सिटी एसपी, 200 लाठी पार्टी,500 से अधिक राइफलधारी और 50 महिला पुलिस सहित एसटीएफ के जवान तैनात किए गए हैं।
बीजेपी शासित राज्यों में डोमिसाइल नीति लागू क्यों नहीं करती बीजेपी
बीजेपी पर राज्य के युवाओं को धोखा देने का आरोप लगाते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता राजीव रंजन ने सवाल किया है कि बीजेपी अपने शासित राज्यों में डोमिसाइल नीति लागू क्यों नहीं करती है ,?उन्होंने बुधवार को कहा कि एक तरफ ये लोग बिहार के युवाओं को डोमिसाइल के नाम पर उपद्रव करने के लिए भड़काते हैं वहीं दूसरी तरफ अपने शासित राज्यों में इसे लागू करना तो दूर इस पर चर्चा तक नहीं करते हैं । केंद्र में सरकार भी उनकी ही है।वे बताएं कि क्यों नहीं वे संसद के जरिए कानून लाकर इसे पूरे देश में लागू कर देते हैं।
बीजेपी जानती है डोमिसाइल नीति लागू करना संभव नहीं
राजीव रंजन ने कहा कि बीजेपी या जानती है कि मौजूदा हालातों में डोमिसाइल नीति लागू करना किसी भी राज्य के लिए संभव नहीं है। बीजेपी यह जानती है कि यदि सभी राज्यों में डोमिसाइल नीति लागू हो गई इसका सबसे बड़ा नुकसान बिहार के युवाओं को ही उठाना पड़ेगा।हर कोई अच्छे से जानते हैं कि बिहारियों की सबसे बड़ी पूंजी मानव संसाधन ही है। बिहार के लोग बड़ी संख्या में देश के अन्य भागों में काम करते हैं,इसके बावजूद युवाओं को इस पर भड़काना बीजेपी के दोहरे चरित्र को दर्शाता है। वे चाहते हैं कोर्ट कचहरी के चक्कर में यहां बहालियां रुक जाएं और हमारे युवा अगले 7- 8 साल तक नौकरी से वंचित हो जाएं।
