पटना: बिहार में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब पूरे राज्य में स्थापित करीब 3.36 लाख वितरण ट्रांसफॉर्मरों की नियमित तकनीकी जांच, परीक्षण और अनुरक्षण (मेंटेनेंस) किया जाएगा। इस विशेष अभियान का उद्देश्य संभावित खराबियों का समय रहते पता लगाकर उपभोक्ताओं को बिना बाधा गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है।
इस संबंध में शुक्रवार को पटना स्थित विद्युत भवन में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
बैठक को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि राज्य के अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक उपभोक्ता को सुरक्षित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए वितरण ट्रांसफॉर्मरों, बिजली लाइनों और अन्य विद्युत संरचनाओं का नियमित निरीक्षण, समयबद्ध परीक्षण और अनुरक्षण अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिजली व्यवस्था में किसी भी तरह की तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए उसका समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
1912 पर मिलने वाली शिकायतों का होगा डेटा आधारित विश्लेषण

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि टोल-फ्री नंबर 1912, सहयोग शिविर और ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त उपभोक्ताओं की शिकायतों एवं सुझावों का नियमित विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कृषि फीडरों, ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विशेष निगरानी करने के भी निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि ट्रांसफॉर्मरों की देखभाल केवल उपकरणों की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। इसलिए सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों और समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
मोबाइल ऐप से होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग

ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि बिजली संरचनाओं के निरीक्षण और अनुरक्षण को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। अब मोबाइल ऐप के माध्यम से निरीक्षण कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और कार्यों की नियमित निगरानी संभव होगी।
अधिकारियों के लिए तय हुई जिम्मेदारियां
बैठक में सभी कनीय और सहायक विद्युत अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। वहीं, कार्यपालक अभियंताओं को समय पर मरम्मत और अनुरक्षण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधीक्षण अभियंताओं को आवश्यक सामग्रियों की उपलब्धता और पूरे अनुरक्षण कार्य की निगरानी का दायित्व दिया गया।
हर महीने होगा ट्रांसफॉर्मरों और उपकेंद्रों का निरीक्षण
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक माह संबंधित क्षेत्र के 33 प्रतिशत वितरण उपकेंद्रों (DSS) का निरीक्षण कनीय अभियंता करेंगे। इनमें से 10 प्रतिशत का निरीक्षण सहायक अभियंता और 5 प्रतिशत का निरीक्षण कार्यपालक अभियंता करेंगे।
इसी तरह सभी 33/11 केवी विद्युत शक्ति उपकेंद्रों का भी हर महीने निरीक्षण किया जाएगा। उच्च अधिकारियों द्वारा भी तय प्रतिशत के अनुसार नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि निरीक्षण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनी रहे।
ब्रेकडाउन पर तुरंत होगी बिजली बहाल
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि बिजली लाइनों में किसी भी तरह का ब्रेकडाउन होने पर निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत तत्काल बिजली बहाल की जाए। साथ ही 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों के नियमित अनुरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सभी ढीले या लटकते बिजली के तारों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी बिजली व्यवस्था की विश्वसनीयता
बैठक में बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि डिजिटल मॉनिटरिंग, नियमित निरीक्षण और निवारक अनुरक्षण (Preventive Maintenance) के जरिए बिजली व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाएगा।
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्यभर के क्षेत्रीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।

