पटना: गन्ना उद्योग विभाग किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही गन्ना उत्पादन में वृद्धि करने के उद्देश्य से आधुनिक तरीके से वर्षाकालीन अवधि में गन्ना की खेती कराने की तैयारी शुरू कर दी है। ताकि वर्षाकालीन अवधि में रोपे गए गन्ना से फरवरी में उसका बीज तैयार हो और उसकी खूंटी से नवंबर-दिसंबर तक दूसरी फसल तैयार हो जाए। इस तरह की खेती से गन्ना किसानों को एक वर्ष में दोहरा फायदा होगा।
विदित हो कि राज्य सरकार ने नई चीनी मिलों और संचालित पुरानी चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गन्ना विस्तार कार्यक्रम शुरू किया है। जिससे कि बिहार में गन्ना की खेती का विस्तार किया जा सके। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा वर्षाकालीन गन्ना की खेती करने की तैयारी की जा रही है, जिससे कि वर्षाकालीन अवधि में लगाए गए गन्ने से फरवरी माह में उसका बीज तैयार हो और किसानों को उसका लाभ मिले। उसके बाद नवंबर-दिसंबर तक खूंटी से तैयार हुए गन्ना फसल से भी किसानों को आय होगा। इस तरह से किसान एक बार गन्ने की रोपाई से बीज उत्पादन के साथ ही रैटून फसल के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकेंगे।
बिहार के इन चीनी मिल क्षेत्रों में हो रही वर्षाकालीन गन्ना बुआई
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार इस साल रीगा, हसनपुर, मझौलिया और प्रतापपुर चीनी मिल क्षेत्रों में वर्षाकालीन गन्ने की रोपाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं अन्य क्षेत्रों में किसानों को वर्षाकालीन गन्ना रोपाई के लाभ एवं उचित फसल प्रबंधन के संबंध में जागरूक किया जा रहा है।
जलजमाव रहित और ऊंचे क्षेत्रों में करें गन्ना की रोपाई
बताया जाता है कि वर्षाकालीन गन्ने की रोपाई के लिए ऐसे खेतों का चयन करना आवश्यक है, जहां बाढ़ का पानी जमा न होता हो तथा खेत निचले एवं जलजमाव वाले क्षेत्र से मुक्त हों। जल निकास की उचित व्यवस्था वाले खेत वर्षाकालीन गन्ने की खेती के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे उपयुक्त खेतों में वर्षाकालीन गन्ने की रोपाई अपनाकर बीज उत्पादन एवं रैटून फसल के माध्यम से एक वर्ष में दोहरा लाभ प्राप्त करें और अपनी आय में वृद्धि करें।

