Bihar Flood Update: बाढ़ के बीच राहत की खबर! कोसी और सोन का पानी घटने लगा, 456 कम्युनिटी किचन में पक रहा खाना

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पटना: बिहार में बाढ़ की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ते जल संकट के बीच अब कुछ इलाकों से राहत के संकेत मिलने लगे हैं। राज्य की प्रमुख नदियों में कोसी और सोन के जलस्राव में कमी की प्रवृत्ति दर्ज की गई है, जबकि गंडक का जलस्राव स्थिर बना हुआ है। हालांकि कई स्थानों पर गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चलाया जा रहा है। राज्य के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में 456 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहां अब तक 10 लाख से अधिक लोगों को सुबह और शाम भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।

35.89 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित

बाढ़ का असर राज्य के 14 जिलों के 82 प्रखंडों और 491 ग्राम पंचायतों तक पहुंचा है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल में करीब 35.89 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

राहत शिविरों में भोजन से लेकर मेडिकल सुविधा तक

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य में 14 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में 12 हजार से अधिक लोगों के रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था की गई है।

खास बात यह है कि राहत शिविरों में बच्चों के लिए दूध का वितरण किया जा रहा है, जबकि महिलाओं को सैनिटरी किट उपलब्ध कराई जा रही है। प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

1.2 लाख से ज्यादा पॉलीथीन शीट बांटी गईं

बारिश और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत देने के लिए अब तक 1.2 लाख से अधिक पॉलीथीन शीट वितरित की जा चुकी हैं। इसके अलावा करीब 22,900 ड्राई राशन पैकेट भी लोगों के बीच बांटे गए हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए भी राहत व्यवस्था की गई है। अब तक 4,650 क्विंटल से अधिक पशुचारा वितरित किया जा चुका है।

1,876 नावें और 37 बचाव टीमें तैनात

बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों के आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 1,876 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव अभियान चलाने के लिए SDRF की 27 और NDRF की 10 टीमें विभिन्न जिलों में तैनात हैं। इससे साफ है कि प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करना है।

कोसी, सोन और गंडक के जलस्राव की स्थिति

वीरपुर बराज पर मंगलवार शाम 6 बजे तक कोसी नदी का जलस्राव 1,61,135 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसकी प्रवृत्ति घटने की बताई गई है। इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 1,05,827 क्यूसेक दर्ज हुआ, जिसकी प्रवृत्ति स्थिर बताई गई है। वहीं वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 92,900 क्यूसेक रहा और इसमें कमी की प्रवृत्ति दर्ज की गई।

हालांकि भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया, जो 17 अगस्त 2021 के 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से 0.05 मीटर अधिक है। यहां जलस्तर की प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बताई गई है।

बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता

बाढ़ के बीच आने वाले दिनों में मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 1 जून से 8 सितंबर तक राज्य में 601.1 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। हालांकि सितंबर में अब तक बारिश सामान्य से 31 प्रतिशत अधिक रही है।

अगले दो दिनों में बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी बनी रहेगी।

फिलहाल कोसी और सोन के जलस्राव में कमी को राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन कई नदियों के अब भी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान को जारी रखा है।

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