बिहार में खाद-बीज की गड़बड़ी पर सरकार सख्त, 294 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द; 58 पर FIR

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पटना: बिहार में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक, बीज और कीटनाशी उपलब्ध कराने को लेकर कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि अमानक कृषि उपादान की बिक्री, अधिक कीमत वसूली, अनियमित वितरण, टैगिंग या किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले थोक और खुदरा प्रतिष्ठानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और संबंधित धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।

बैठक में उर्वरक, बीज और कीटनाशी की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, होलसेलर और रिटेलर स्तर पर आपूर्ति, कंपनियों द्वारा निर्धारित दर तथा FoR (Freight on Road) व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन समेत किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई।

किसानों को उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना प्राथमिकता

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि उपादान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में किसी भी स्तर पर मनमानी, अनुचित व्यापारिक व्यवहार या उर्वरक वितरण में अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए किसानों और राज्य की उर्वरक वितरण व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि बिहार को कंपनियों की चारागाह नहीं बनने दिया जाएगा। किसानों के हितों की अनदेखी और विभागीय निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी।

FoR व्यवस्था को जमीन पर लागू कराने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार FoR व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए भारत सरकार और संबंधित कंपनियों के साथ आवश्यक समन्वय करेगी। उन्होंने कंपनियों से कहा कि FoR व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ समय पर किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए कंपनियों को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ आवश्यक कदम उठाने होंगे।

होलसेलर, रैक हैंडलर और कंपनियों को निर्देश

बैठक में उर्वरक वितरण व्यवस्था से जुड़े होलसेलर, रैक हैंडलर और संबंधित कंपनियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि यदि किसी होलसेलर को संबंधित कंपनी की निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है, तो वह इसकी सूचना विभाग को दे। कंपनियों या किसी अन्य स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों के होलसेलरों के साथ बैठक कर उर्वरक आपूर्ति और वितरण से जुड़ी समस्याओं की विस्तृत जानकारी लेने तथा उसका प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

बिहार में उर्वरक का कितना स्टॉक उपलब्ध?

कृषि मंत्री के अनुसार राज्य में विभिन्न प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। 13 अगस्त 2026 तक राज्य में उपलब्ध भंडार इस प्रकार है:

यूरिया: 3.82 लाख मीट्रिक टन
डीएपी: 1.33 लाख मीट्रिक टन
एनपीके: 2.46 लाख मीट्रिक टन
एमओपी: 0.67 लाख मीट्रिक टन
एसएसपी: 1.23 लाख मीट्रिक टन

मंत्री ने प्रखंडवार उर्वरक का उप-आवंटन संबंधित क्षेत्र के फसल आच्छादन और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों की मांग के अनुसार समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो सके।

58 प्रतिष्ठानों पर FIR, 294 के प्राधिकार पत्र रद्द

उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित से अधिक कीमत पर बिक्री पर नियंत्रण के लिए लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2026-27 में 13 अगस्त 2026 तक अनियमितता के मामले में 58 उर्वरक प्रतिष्ठानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा 294 उर्वरक प्रतिष्ठानों के उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द किए जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि किसानों के हित में जल्द ही सघन जांच और निगरानी अभियान शुरू किया जाएगा।

खाद-बीज से लेकर रिटेलर तक होगी जांच

प्रस्तावित जांच अभियान के दौरान उर्वरक, बीज और कीटनाशी की उपलब्धता, आपूर्ति, कीमत और वितरण व्यवस्था की जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंपनियों से लेकर रिटेलर स्तर तक उर्वरक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हो रही है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक निर्धारित और उचित दर पर उर्वरक आसानी से उपलब्ध हो। कृषि मंत्री ने दोहराया कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

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