Bihar News: गुड़ उद्योग लगाने वालों के लिए सुनहरा अवसर, बिहार सरकार देगी ₹1 करोड़ तक का अनुदान; आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

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Bihar News: गन्ना किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। राज्य में गुड़ उत्पादन इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 25 जुलाई कर दी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों और निवेशकों को इकाई की क्षमता के अनुसार 6 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।

गुड़ उद्योग को बढ़ावा देने की पहल

गन्ना उद्योग विभाग की ओर से संचालित बिहार राज्य गुड़ उद्योग प्रोत्साहन कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में आधुनिक गुड़ उत्पादन इकाइयों की संख्या बढ़ाना और गन्ना आधारित उद्योगों को नई गति देना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

25 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहले चरण में आवेदन की अंतिम तिथि पहले 25 जून तय की गई थी। अब इच्छुक किसानों और निवेशकों की सुविधा को देखते हुए इसे बढ़ाकर 25 जुलाई कर दिया गया है। विभाग ने सभी पात्र आवेदकों से समय रहते ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है।

50 फीसदी तक मिलेगी सब्सिडी

योजना के तहत गुड़ उत्पादन इकाई स्थापित करने की लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। अनुदान की राशि इकाई की प्रतिदिन गन्ना पेराई क्षमता के आधार पर तय होगी।

  • 5 से 20 टन प्रतिदिन क्षमता वाली इकाइयों को अधिकतम ₹6 लाख तक का अनुदान।
  • 21 से 40 टन प्रतिदिन क्षमता पर अधिकतम ₹15 लाख की सहायता।
  • 41 से 60 टन प्रतिदिन क्षमता वाली इकाइयों को अधिकतम ₹45 लाख तक का अनुदान।
  • 60 टन से अधिक प्रतिदिन क्षमता वाली इकाइयों के लिए अधिकतम ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

कहां करें आवेदन?

योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान और निवेशक गन्ना उद्योग विभाग के आधिकारिक पोर्टल ccs.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों और उद्यमियों को इस योजना से जोड़कर राज्य में गुड़ उद्योग का विस्तार करना है।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से गन्ना उत्पादकों को अपनी फसल के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग विकसित होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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