Bihar News: बिहार में बैंकिंग सेक्टर पर सरकार की बड़ी सख्ती, 15 बैंकों को चेतावनी; 6 महीने में सुधार नहीं तो सरकारी डिपॉजिट पर लगेगी रोक

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Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकिंग सेवाओं की धीमी रफ्तार और कमजोर प्रदर्शन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो बैंक सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करेंगे और निर्धारित अवधि में सुधार नहीं दिखाएंगे, उनके यहां सरकारी जमा (Government Deposit) रखने पर रोक लगाई जा सकती है।

उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य के बैंकिंग प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने और राज्य में ऋण वितरण बढ़ाने के लिए पांच अहम सुझाव दिए गए हैं।

CD Ratio बढ़ाने पर सरकार का फोकस

समिति ने माना कि राज्य के आर्थिक विकास के लिए साख-जमा अनुपात (CD Ratio) में सुधार बेहद जरूरी है। इसके लिए वार्षिक साख योजना (ACP) का लक्ष्य संभावित जमा राशि के कम से कम 80 प्रतिशत के बराबर निर्धारित करने की अनुशंसा की गई है।

नाबार्ड द्वारा तैयार किए गए 3.55 लाख करोड़ रुपये के संभावित ऋण योजना (PLP) के आधार पर नए ACP लक्ष्य तय करने का सुझाव भी दिया गया है।

SBI और PNB के प्रदर्शन पर विशेष नजर

समीक्षा में पाया गया कि राज्य के कुल CD Ratio पर कुछ बड़े बैंकों का असर पड़ रहा है। समिति के अनुसार यदि केवल SBI को अलग कर दिया जाए तो राज्य का CD Ratio 68.16 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जबकि SBI और PNB दोनों को हटाने पर यह आंकड़ा 72.75 प्रतिशत हो जाता है।

इसी वजह से समिति ने सुझाव दिया है कि बड़े बैंकों को अधिक ऋण वितरण लक्ष्य दिए जाएं ताकि राज्य का समग्र CD Ratio बेहतर हो सके।

जनसमर्थ पोर्टल से जुड़ेगी सरकारी ऋण योजनाएं

बैठक में यह भी सिफारिश की गई कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) समेत विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे आवेदनों की प्रक्रिया आसान होगी और ऋण वितरण की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

सरकार पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले सहयोग शिविरों में भी जनसमर्थ पोर्टल के प्रचार-प्रसार पर जोर देगी ताकि अधिक से अधिक किसान और स्वयं सहायता समूह इसका लाभ उठा सकें।

इन बैंकों की होगी विशेष मॉनिटरिंग

उच्च स्तरीय समिति ने 15 प्रमुख बैंकों के प्रदर्शन पर विशेष निगरानी रखने की सिफारिश की है। इनमें शामिल हैं:

  • UCO Bank
  • Union Bank of India
  • Central Bank of India
  • Punjab National Bank
  • Bank of India
  • State Bank of India
  • IDBI Bank
  • Indian Overseas Bank
  • Bandhan Bank
  • Bank of Maharashtra
  • Karnataka Bank
  • Unity Small Finance Bank
  • IndusInd Bank
  • Utkarsh Small Finance Bank
  • Karur Vysya Bank

समिति ने कहा है कि जिन बैंकों की उपलब्धि निर्धारित मानकों से काफी कम है, उन्हें निगरानी सूची में रखा जाएगा। यदि अगले छह महीनों में उनकी कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता है तो उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने की कार्रवाई की जा सकती है।

बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनी है समिति

राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक के बाद इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना, ऋण वितरण बढ़ाना और राज्य के वित्तीय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करना है।

वित्त विभाग का मानना है कि बैंकों की सक्रिय भागीदारी से कृषि, उद्योग, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी तथा राज्य के विकास को मजबूती मिलेगी।

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